जिला चिकित्सालय दतिया में बिना अतिरिक्त बजट के विकसित हुआ अत्याधुनिक
दतिया। जिला चिकित्सालय दतिया ने तकनीकी नवाचार की दिशा में एक सराहनीय कदम उठाते हुए एस.एन.सी.यू. यूनिट के कॉरिडोर में एक हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित किया है।
यह डिवाइस न केवल चिकित्सालय की विद्युत आपूर्ति प्रणाली को अधिक सुरक्षित और संगठित बनाता है, बल्कि जनरेटर संचालन एवं डिज़ल की अनावश्यक खपत को भी नियंत्रित करने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।
बिना किसी अतिरिक्त व्यय के तैयार किया गया नवाचार, इस डिवाइस की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसे किसी भी प्रकार की अतिरिक्त खरीद या बजट व्यय के बिना तैयार किया गया है। अस्पताल में पड़े कबाड़, अतिरिक्त सामग्री तथा उपलब्ध उपकरणों का सृजनात्मक उपयोग कर इसे विकसित किया गया है।
यह कार्य न केवल तकनीकी कौशल का उदाहरण है, बल्कि संसाधन-संयम तथा नवोन्मेषी सोच का भी प्रमाण है, नवजात, प्रसूता और आपातकालीन वार्डों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका जिला चिकित्सालय में भर्ती नवजात शिशुओं, प्रसूता आपातकाल, ऑपरेशन थिएटर तथा अन्य वार्डों में जीवनरक्षक उपकरण 24 घंटे निर्बाध बिजली पर निर्भर रहते है।
बिजली की किसी भी प्रकार की बाधा से उपचार प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इस गंभीर आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए यह सिस्टम तैयार किया गया है, जो विद्युत आपूर्ति में किसी भी परिवर्तन को तुरंत प्रदर्शित करता है।
रीयल-टाइम मॉनिटरिंग से समय पर सक्रियता संभव सिस्टम में 100 KVA और 200 KVA दोनों जनरेटरों की फीड लाइनें जोड़ी गई है। एमपीईबी से आपूर्ति आने या बंद होने पर यह डिवाइस तत्काल सिग्नल प्रदर्शित करता है।
बिजली आने या जाने की स्थिति में बजर से तेज आवाज में अलर्ट मिलता है, जिससे वार्ड बॉय, ऑपरेटर और तकनीकी स्टाफ तुरंत जनरेटर संचालन की कार्रवाई कर लेते है। इससे किसी भी वार्ड में बिजली बाधा का जोखिम काफी कम हो गया है।
ट्रांसफॉर्मरों एवं लाइन ट्रिपिंग पर भी सतर्कता,जिला चिकित्सालय परिसर में लगाए गए दोनों ट्रांसफॉर्मरों और मुख्य विद्युत नियंत्रण कक्ष में होने वाली लाइन ट्रिपिंग, फॉल्ट अथवा एमपीईबी द्वारा लाइन कट की जानकारी भी यह डिवाइस तुरंत उपलब्ध कराता है।
इस सुविधा से तकनीकी स्टाफ संभावित विद्युत संकटों को समय रहते नियंत्रित कर सकता है, जिससे अस्पताल की कार्यप्रणाली अधिक सुचारू रहती है। मोबाइल से लाइव निगरानी – सुविधा और सुरक्षा का मेल,डिवाइस के सामने लगाई गई हाई-रिज़ॉल्यूशन ऑनलाइन कैमरा प्रणाली इसे और भी उन्नत बनाती है।
कैमरा वाई-फाई से लगातार जुड़ा रहता है, जिसके माध्यम से डिवाइस की रीडिंग, संकेत और अलर्ट मोबाइल फोन पर लाइव देखे जा सकते हैं। इससे वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी स्टाफ और संबंधित जिम्मेदार व्यक्ति किसी भी स्थान से बिजली व्यवस्था की निगरानी कर सकते है।
डॉ. के.सी. राठौर की संवेदनशीलता और नेतृत्व की सराहना, इस पूरी अभिनव तकनीकी व्यवस्था की स्थापना में जिला चिकित्सालय के प्रभारी, डॉ. के.सी. राठौर के संवेदनशील दृष्टिकोण और प्रभावी नेतृत्व की अहम भूमिका रही।
उनकी प्राथमिकता अस्पताल की सुरक्षा, सेवा गुणवत्ता तथा संसाधन- संयम को बढ़ाना रही है, जिसके परिणामस्वरूप यह अनूठा प्रोजेक्ट बिना किसी अतिरिक्त बजट के संभव हुआ,
इलेक्ट्रीशियन अनिल सक्सेना की नवाचार क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण,इस प्रणाली के विकास और स्थापना में इलेक्ट्रीशियन अनिल सक्सेना का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा।
उन्होंने उपलब्ध कबाड़ सामग्री से एक ऐसा डिवाइस तैयार किया, जो सामान्यतः महंगे उपकरणों के तौर पर बाजार में उपलब्ध होता है।
सीमित संसाधनों में इस कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करना उनके तकनीकी कौशल, नवाचार-क्षमता तथा समर्पण को दर्शाता है। उनका यह कार्य न केवल प्रशंसनीय है, बल्कि जिला चिकित्सालय के लिए गर्व का विषय भी है।
यह हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक मॉनिटरिंग सिस्टम अस्पताल की विद्युत व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और पारदर्शी बनाता है।
साथ ही यह साबित करता है कि नवाचार हमेशा बड़े बजट से नहीं, बल्कि कुशल सोच और समर्पण से भी संभव है। दतिया जिला चिकित्सालय का यह प्रयास प्रदेश में संसाधन-संयम आधारित तकनीकी उन्नयन का प्रेरणादायी उदाहरण माना जा रहा है।









