जिम्मेदार कौन जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक ने किसने कितने खाए पैसे।
आष्टा । ग्राम पंचायत कजलास के आश्रित गांव बिसूखेड़ी में बनी 13 लाख हजार रुपये की लागत की कंक्रीट की सड़क में कही जगह दरारें आ गई हे
वह तक तो ठीक था मगर सवाल यह हे कि सड़क को बने साल भर भी नहीं हुआ हे न ही उस सड़क पर कोई भारी वाहन चलता हे तो सड़क में दरार आई कैसे आपको बताते चले कि जब इस सड़क जो देवकरण पटेल के घर से लेकर प्राथमिक स्कूल तक बन रही थी
उस समय भी कबीर मिशन समाचार के पत्रकार संजय सोलंकी ने घटिया निर्माण को लेकर सरपंच से लेकर जनपद पंचायत सीईओ जनपद पंचायत अध्यक्ष ,जिला पंचायत सदस्य एवं तत्कालीन जिला कलेक्टर तक को इस मामले की जानकारी दी थी
लेकिन सड़क की जांच हुई और इंजीनियर मैडम ने कहा था कि सड़क एक दम ठीक हे कोई दिक्कत नहीं है निर्माण कार्य सही हुआ है तो आज सवाल उठता हे कि अगर निर्माण कार्य सही हुआ है
तो 10 महीने में ही सड़क में दरार कैसे आ गई या तो इंजिनियर ने सही से जांच नहीं की जिसके कारण उच्च लेवल के अधिकारियों की बेंच तक फाइल गई ही नहीं या जाते जाते या तो फाइल खो गई या रद्दी समझकर कही कूड़ेदान में फेक दी या फिर किसी ने किसी की जेब गर्म कर दी हो जिससे जांच की फाइल ठंडी हो गई हो सवाल तो यह भी उठता हे कि जब मामला जिला कलेक्टर तक पहुंचा तो क्या कार्यवाही हुई
सड़क के कई हिस्सों में दरारें पड़ गई हैं, कई जगह तो पूरा कंक्रीट की जगह बैठने लगी है जिससे अंदाजा लगाया जा सकता हे कि सड़क ज्यादा दिन चलने वाली नहीं है, ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बनते समय ही घटिया सामग्री का उपयोग किया गया था।
स्थानीय सरपंच, उपसरपंच, सचिव, रोजगार सहायक से लेकर जनपद पंचायत आष्टा के इंजीनियरिंग स्टाफ तक ने निर्माण कार्य की निगरानी तक नहीं की।ग्रामीणों ने बताया कि सड़क बनने के सिर्फ 4-5 महीने बाद ही दरारें पड़नी शुरू हो गई थीं, लेकिन किसी ने भी ध्यान नहीं दिया।
ग्रामीणों का आरोप – “सबने मिलकर खा लिया पैसा”गांव के कही लोगो का कहना है कि ,जनप्रतिनिधि हो या अधिकारी, सबने मिलकर पैसा खा लिया होगा। 13 लाख 97 हजार 794 रुपये की सड़क 10 महीने भी नहीं टिक सकी। अब कौन जिम्मेदारी लेगा? जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
“ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर, जनपद सीईओ एवं संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि तत्काल इस सड़क की जांच कराई जाए और दोबारा गुणवत्तापूर्ण सड़क बनवाई जाए। साथ ही घटिया निर्माण करने वाले जिम्मेदारों व लापरवाही बरतने वाले जनप्रतिधियो अधिकारियों-कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
यह मामला एक बार फिर सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार और लापरवाही की पोल खोल रहा है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाता है।








