मध्यप्रदेश समाज

पण्डोखर धाम महोत्सव: पुष्पावती तट पर पहली बार भव्य सामूहिक गंगा आरती, अगले वर्ष से शाही स्नान की घोषणा।

दतिया। पण्डोखर धाम महोत्सव इस वर्ष आस्था, संस्कृति और परंपरा का अद्भुत संगम बनकर उभरा। महोत्सव के दौरान पहली बार पुष्पावती (पहुज) नदी के तट पर भव्य सामूहिक गंगा आरती का आयोजन किया गया, जिसने हजारों श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक भाव से अभिभूत कर दिया।

इस अवसर पर पण्डोखर धाम के पीठाधीश्वर पूज्य गुरुशरण महाराज ने घोषणा की कि आगामी वर्ष से पुष्पावती तट पर परंपरागत शाही स्नान की शुरुआत की जाएगी, जिसमें देशभर के नागा अखाड़ों के साधु-संत भाग लेंगे, पुष्पावती तट पर गूंजा आस्था का स्वर, हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर आयोजित 30वें पण्डोखर महोत्सव के अंतर्गत निकली भव्य मंगल कलश यात्रा का समापन पुष्पावती तट पर हुआ, जहां काशी और प्रयागराज से आए विद्वान पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधिवत गंगा आरती संपन्न कराई गई।

आरती के दौरान जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर सहित सैकड़ों साधु-संतों की उपस्थिति ने आयोजन को और भी दिव्य बना दिया।हजारों श्रद्धालुओं ने हाथों में दीप जलाकर आरती में सहभागिता की। तट का दृश्य दीपों की रोशनी और मंत्रोच्चार से ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो आस्था स्वयं साकार रूप में उतर आई हो।

गुरुशरण महाराज की बड़ी घोषणा, इस अवसर पर गुरुशरण महाराज ने कहा कि पुष्पावती एक प्राचीन एवं पौराणिक नदी है, जिसका उल्लेख महाभारत के वनपर्व में मिलता है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में इसकी महत्ता निरंतर बढ़ रही है और लोगों की गहरी आस्था पण्डोखर धाम के प्रति जुड़ी हुई है।

इसी को ध्यान में रखते हुए अगले वर्ष से यहां शाही स्नान की परंपरा प्रारंभ करने का प्रयास किया जाएगा, जिसमें सभी प्रमुख अखाड़ों के संत-महात्मा सम्मिलित होंगे, भव्य कलश यात्रा में उमड़ा जनसैलाब, महोत्सव के तहत आयोजित मंगल कलश यात्रा में क्षेत्र सहित देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। यह शोभायात्रा गुरुशरण महाराज के सान्निध्य में बड़े ही धूमधाम और भक्ति भाव से निकाली गई।

कलश यात्रा में बुंदेलखंड की पारंपरिक शस्त्र कला और मार्शल आर्ट का शानदार प्रदर्शन देखने को मिला। डमरू दलों की गूंजती धुनों और भक्तिमय भजनों के साथ सैकड़ों कलाकार नृत्य करते हुए आगे बढ़े। ‘सोवत’ जैसी प्राचीन लोककला के माध्यम से कलाकारों ने भजनों की प्रस्तुति दी, जिसमें महिला वेष में नृत्य कर सांस्कृतिक विरासत को जीवंत किया गया।

सजीव झांकियों ने मोहा मन शोभायात्रा में भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, माता सीता और हनुमान की सजीव झांकियों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। वहीं माता महाकाली का रौद्र रूप और राधा-कृष्ण की रासलीला ने पूरे वातावरण को भक्ति मय बना दिया। इन झांकियों ने न केवल धार्मिक आस्था को प्रकट किया, बल्कि सांस्कृतिक समृद्धि का भी सुंदर प्रदर्शन किया।

महायज्ञ और कथा का शुभारंभ कलश यात्रा विभिन्न मंदिरों के दर्शन करते हुए श्रीराम महायज्ञ स्थल पहुंची, जहां हजारों महिलाओं ने सिर पर धारण किए कलश स्थापित किए। तीन अप्रैल से श्रीराम महायज्ञ का विधिवत शुभारंभ हो चुका है। महोत्सव के दौरान प्रतिदिन वृंदावन धाम के पंडित विनोद शास्त्री महाराज द्वारा श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कराया जा रहा है, जो 9 अप्रैल तक चलेगी।

इसके पश्चात 10 अप्रैल से उत्तराखंड के पंडित ब्रजरज अभिषेक वशिष्ठ द्वारा हनुमत कथा का आयोजन किया जाएगा। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम, कलश यात्रा के उपरांत सांस्कृतिक मंच पर बुंदेलखंड की पारंपरिक जवाबी कीर्तन प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें स्थानीय कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

पण्डोखर धाम ट्रस्ट के संस्थापक एवं सचिव मुकेश कुमार गुप्ता ने बताया कि महोत्सव के दौरान प्रतिदिन रामलीला मंचन सहित विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। चार अप्रैल को सौम्या बुधोलिया एवं खनिजदेव चौहान ग्रुप द्वारा भजन संध्या प्रस्तुत की जाएगी, जबकि पांच अप्रैल को प्रसिद्ध लोकगायक जयसिंह राजा एंड ग्रुप अपनी प्रस्तुति देंगे।

आस्था और संस्कृति का संगम, पण्डोखर धाम महोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनता जा रहा है, बल्कि बुंदेलखंड की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को भी नई पहचान दे रहा है। पुष्पावती तट पर हुई पहली सामूहिक गंगा आरती और शाही स्नान की घोषणा ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया है। आने वाले वर्षों में यह महोत्सव और भी भव्य स्वरूप में सामने आने की संभावना।

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