मानवता की मिसाल: इंसानियत का कोई मजहब नहीं होता! अब्दुल राशीद उर्फ़ कालू कमरदीपुरा शाजापुर
शाजापुर, मध्य प्रदेश:जहाँ एक तरफ समाज को बाँटने वाली खबरें अक्सर सामने आती हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग अपनी दरियादिली से यह साबित कर देते हैं कि इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है। जिला अस्पताल शाजापुर (District Hospital Shajapur) से एक ऐसी ही दिल को छू लेने वाली और प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है।
क्या है पूरा मामला?जिला अस्पताल शाजापुर के ब्लड सेंटर (Blood Center) से जारी डिमांड फॉर्म के अनुसार, पाखी (पिता- कैलाश) नामक मरीज को गंभीर एनीमिया (Anaemia) की शिकायत थी और उनके इलाज के लिए तुरंत खून की आवश्यकता थी।मरीज को पहले भी कई यूनिट रक्त दिया जा चुका था और उस समय उनकी स्थिति नाजुक थी।
ऐसे वक्त में एक मुस्लिम भाई ने आगे आकर रक्तदान (Blood Donation) किया और अपनी इंसानियत का फर्ज निभाया। संदेशइस तस्वीर और घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जरूरत के वक्त सिर्फ एक ही रिश्ता मायने रखता है – इंसानियत का रिश्ता। रक्त का कोई रंग या मजहब नहीं होता, और एक जरूरतमंद की जान बचाने के लिए आगे आया यह कदम समाज के लिए एक मिसाल है।