राजनगर राज पैलेस का 56 मिनट का दौरा और अधूरे वादे
राजनगर राज पैलेस का 56 मिनट का दौरा और अधूरे वादे
मधुबनी जिले के राजनगर में हाल ही में हुए एक वीआईपी दौरे ने एक बार फिर पुरानी कहावत—”माल महाराज का, मिर्जा खेले होली”—को चरितार्थ कर दिया है। लेखक एवं पत्रकार प्रदीप कुमार नायक की रिपोर्ट के अनुसार, 6 सितंबर 2026 को बिहार के मुख्यमंत्री (रिपोर्ट में उल्लेखित) राजनगर राज पैलेस आए थे, लेकिन इस दौरे से स्थानीय जनता को निराशा ही हाथ लगी।दौरे का
मुख्य घटनाक्रम (56 मिनट का सफर)आगमन: दोपहर 3:14 बजे राज खेल मैदान पर हेलीकॉप्टर उतरा।पूजा-अर्चना: कामाख्या मंदिर में 10 मिनट तक पूजा की गई।प्रजेंटेशन बैठक: एसएसबी (SSB) कैंप में डीएम आनंद शर्मा द्वारा राज परिसर की जमीन, इतिहास और विरासत पर 25 मिनट तक लाइव प्रेजेंटेशन दिया गया। इस बैठक में सांसद अशोक
यादव, प्रभारी मंत्री लेशी सिंह, डीएम और एसएसपी मौजूद थे।प्रस्थान: शाम 4:10 बजे मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर में बैठकर राजनगर से 10 किमी दूर पिलखवार गांव के एक निजी श्राद्ध भोज में शामिल होने के लिए रवाना हो गए।सवाल: इस बात पर सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या यह आधिकारिक दौरा सरकारी था या फिर पिलखवार के निजी कार्यक्रम के लिए सरकारी संसाधनों (हेलीकॉप्टर, तेल, सुरक्षा) का उपयोग किया गया।मुख्य विवाद और समस्याएं
वास्तविक हकदारों की अनदेखी:राजनगर राज पैलेस और उसके मंदिरों का मालिकाना हक दरभंगा राजघराने के वारिस कुमार कपिलेश्वर सिंह और पटना हाईकोर्ट द्वारा मान्यता प्राप्त राजनगर रिलीजियस ट्रस्ट के पास है। हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी बैठक में प्रशासन और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे
, लेकिन पैलेस के असली हकदार कपिलेश्वर सिंह और ट्रस्ट के लोगों को शामिल नहीं किया गया।अधूरे वादे और फाइलों में अटका विकास:ट्रस्ट के अनुसार, लगभग डेढ़ साल पहले पर्यटन सचिव अभय कुमार सिंह ने विकास का वादा किया था और लिखित प्रस्ताव मांगा था, लेकिन आज तक जमीन पर कुछ नहीं उतरा।साल 2023 में राजनगर पैलेस में
लाइटिंग, रेस्टोरेंट, कैफेटेरिया और साउंड एंड लाइट शो जैसी घोषणाएं की गई थीं, लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी एक बल्ब तक नहीं लगाया गया है।जानकारों का मानना है कि बिना ट्रस्ट की सहमति और जमीन के स्पष्ट ट्रांसफर के बिना सरकार पैलेस का विकास नहीं कर सकती।राजनगर की वास्तविक मांगेंस्थानीय जनता और विरासत बचाने की लड़ाई लड़ रहे लोगों का साफ कहना है कि उन्हें महज हवाई दौरों और मौखिक आश्वासनों की नहीं, बल्कि ठोस कागजी कार्रवाई की जरूरत है:पर्यटन विभाग की ओर से ट्रस्ट के नाम आधिकारिक लिखित प्रस्ताव।
राजनगर पैलेस के सौंदर्यीकरण और विकास के लिए स्वीकृत बजट का स्पष्ट सरकारी आदेश।डीएम की प्रेजेंटेशन रिपोर्ट पर मुख्यमंत्री कार्यालय का लिखित निर्देश।जब तक ये जरूरी कदम नहीं उठाए जाते, तब तक ऐसे 56 मिनट के दौरे सिर्फ औपचारिकता
बनकर रह जाएंगे और राजनगर का ऐतिहासिक खंडहर अपनी बदहाली पर आंसू बहाता रहेगा।क्या आप इस रिपोर्ट से जुड़ी किसी खास जानकारी या इसमें उठाए गए मुद्दों के किसी अन्य पहलू के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं?