दतिया। जिले के किला चौक पर रविवार को अनुविभागीय अधिकारी राजस्व संतोष तिवारी के मुख्य आतिथ्य में रामलीला के सातवें दिवस पर राम केवट संवाद सहित कई प्रसंगों का मंचन किया गया।
रामलीला के दौरान दर्शकों की संख्या में बेतहाशा बढ़ोतरी हो रही है ।
मंचन भी इस तरह का है कि लोग मैदान में जाने से खुद को नहीं रोक पा रहे। श्रीराम केवट संवाद इतना आनंद देने वाला रहा की भावुकता में तमाम लोगों के आंसू छलक पड़े। मंचन में दिखाया गया कि श्री रामजी केवट से गंगा पार कराने का आग्रह कर रहे है, लेकिन केवट इस जिद पर अड़ा है कि जब तक पैर नहीं पखारेगा तब तक गंगा जी पार नहीं कराएगा ।
इस भावुक दृश्य से रामलीला का आनंद कई गुना बढ़ गया,रामलीला प्रारंभ होने के एसडीएम संतोष तिवारी ने बतौर मुख्य अतिथि पत्नी और बेटा बेटियों समेत भगवान की आरती उतारी। कार्यक्रम के दौरान मुख्य वक्ता के रूप में दिलीप बाल्मीकि मौजूद रहे ।
उनका भी सम्मान किया गया। साथ ही मांझी समाज के कई पदाधिकारियों को शॉल और श्रीफल भेंट कर उन्हें मंच से सम्मानित किया। सुमंत ने किया वनवास चलने का आग्रह लेकिन कर दिया मना केवट संवाद से पूर्व अयोध्या से जब सुमंत जी श्री राम, लक्ष्मण और सीता जी के साथ वन की ओर जाने वाले थे। उन्होंने बहुत आग्रह किया लेकिन श्री राम ने यह कहकर लौटा दिया कि अयोध्या में पिताजी माता का ध्यान कौन रखेगा।
वह बहुत रोए लेकिन उन्हें वन नहीं ले गए। यह संवाद भी बहुत सराहा गया। रामलीला के दौरान एक महिला भावुक होकर स्टेज पर चढ़ गई एवं श्रीराम के चरणों में गिर पड़ी। मना करने के बावजूद वह श्री राम के स्वरूप के चरणों में जाकर गिर पड़ी और भावुक हो गई। इस दौरान आयोजन समिति के पदाधिकारी और सदस्य गण मौजूद रहे ।मंच का संचालन रवि भूषण खरे और रामजी शरण राय ने किया।









