दतिया। जिले में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने हेतु जिला प्रशासन लगातार सक्रिय है। इसी कड़ी में कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी स्वप्निल वानखड़े द्वारा पूर्व में जारी प्रतिबंधात्मक आदेशों के उल्लंघन पर दो अलग-अलग मामलों में कृषकों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि पराली जलाना न सिर्फ पर्यावरण के लिए हानिकारक है बल्कि इससे आमजन के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। इसलिए जिले में पराली जलाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी, प्रतिबंधात्मक आदेश के तहत की जा रही कार्रवाई, कलेक्टर द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163(3) के अंतर्गत पराली एवं नरवाई जलाने पर पूर्णत: प्रतिबंध लगाया गया था।
साथ ही निर्देशित किया गया था कि उल्लंघन की स्थिति में भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 तथा वायु (प्रदूषण, निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1981 के तहत दोषियों पर एफ.आई.आर दर्ज की जाए। प्रशासन के इन निर्देशों के पालन में रविवार को दो अलग-अलग क्षेत्रों में पराली जलाने की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की गई।
पहला मामला: दतिया गिर्द क्षेत्र, हल्का पटवारी भगवान सिंह अहिरवार द्वारा मौजा भ्रमण के दौरान देखा गया कि, सर्वे नम्बर 2496/2, रकवा 2.4280 हेक्टेयर भूमि (मालिक: शंकर, लक्ष्मण, हरिमोहन पुत्रगण जानकी प्रसाद यादव) को बटाई पर लिए हुए बटाईदार मोती कुशवाहा पुत्र गप्पू कुशवाहा, निवासी भाण्डेरी फाटक दतिया, ने करीब 0.08 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की पराली जलाकर प्रतिबंधित गतिविधि को अंजाम दिया।
पटवारी द्वारा मौके पर ही फोटो, वीडियो साक्ष्य, पंचनामा एवं प्रतिवेदन तैयार कर पुलिस थाना दतिया में एफ.आई.आर दर्ज कराई गई।
दूसरा मामला: *हमीरपुर क्षेत्र, इसी प्रकार हल्का पटवारी रामकुमार यादव द्वारा ग्राम हमीरपुर में भ्रमण के दौरान पाया गया कि,सर्वे नम्बर 968, रकवा 4.48 हेक्टेयर भूमि (मालिक: रमेशचंद यादव निवासी दतिया) को ठेका पर लिए हुए बटाईदार आदराम पुत्र पंचूराम पाल निवासी दतिया ने लगभग *0.10 हेक्टेयर क्षेत्र में पराली को आग लगा दी।
इस घटना पर भी विधिवत पंचनामा, फोटो एवं वीडियो प्रमाण तैयार कर संबंधित बटाईदार के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत एफ.आई.आर दर्ज कराई गई। कलेक्टर का सख्त संदेश: “पराली जलाने वालों पर होगी कठोर कार्रवाई” कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े ने कहा कि,शासन एवं जिला प्रशासन पराली जलाने के सख्त खिलाफ है।
पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता है, आमजन के स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है, तथा खेतों व आसपास के क्षेत्रों में आग से जानमाल की क्षति का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए प्रशासनिक टीमें लगातार क्षेत्र का निरीक्षण कर रही है।
पराली जलाते हुए पाए जाने वाले किसी भी कृषक को बख्शा नहीं जाएगा। कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी कृषकों से अपील की कि वे पराली प्रबंधन के वैकल्पिक उपाय अपनाएं और सहयोग करें।









