शाहपुरा-राजेन्द्र खटीक। शाहपुरा — पी.एम. श्री माणिक कंवर राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में मंगलवार को शहीद प्रताप सिंह बारहठ की जननी वीर माता माणिक कंवर की 148 वीं जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानाचार्य रीता धोबी द्वारा प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संस्थान के सचिव कैलाश जड़ावत ने माणिक कंवर के त्याग और राष्ट्रभक्ति पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष के दौरान जब प्रताप सिंह बारहठ अंतिम बार घर आए तो माता माणिक कंवर ने उन्हें अंतिम पाथेय स्वरूप केवल दो रुपये दिए थे। प्रताप के पुनः वापस न आने पर उन्होंने कहा था “अगर तुम मन की बात बता देते तो मैं तुम्हें तिलक लगाकर विदा करती।
”उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि 1914 में शाहपुरा की जागीर जब्त होने के बाद भी माणिक कंवर ने स्वर्णाभूषण स्वीकार करने से इनकार कर दिया था।
बाद में उनके ससुर द्वारा लिखित ऐतिहासिक दस्तावेज को रानी लक्ष्मी कुमारी चुंडावत ने साहित्य रूप दिया। कार्यक्रम में वक्ता राजवीर सिंह चलकोई ने सुझाव दिया कि किसी विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी का नाम वीर माता माणिक कंवर के नाम पर रखा जाना चाहिए।
संस्थान के सदस्य सुरेश चंद्र घुसर ने विद्यार्थियों को बारहठ हवेली का अवलोकन करने का आग्रह किया, वहीं बसंत वैष्णव ने देवखेड़ा में आगामी 23 दिसंबर को होने वाले केसरी सिंह बारहठ प्रतिमा लोकार्पण समारोह में उपस्थित रहने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में छात्राओं ने रंगोली निर्माण कर अपनी भावनाएँ व्यक्त कीं। इस अवसर पर शहीदों पर आधारित प्रतियोगिताओं के परिणाम घोषित किए गए और पुरस्कारों की घोषणा की गई। व्याख्याता राजेश चारण एवं माया कोली सहित विद्यालय स्टाफ उपस्थित रहा।अंत में प्रधानाचार्य रीता धोबी ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।









