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डॉ. अर्जुन सिंह को हटाने की मांग तेज: मेडिकल कॉलेज दतिया के वरिष्ठ डॉक्टरों ने डीन को सौंपा विस्तृत ज्ञापन।

लोकायुक्त प्रकरण में दोषी पाए जाने का आरोप, नियम विरुद्ध प्रभार देने पर उठे सवाल। दतिया। शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय दतिया में अधीक्षक (Superintendent) पद को लेकर बुधवार को बड़ा प्रशासनिक विवाद खड़ा हो गया। कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सकों ने एकजुट होकर डीन के नाम विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें वर्तमान अधीक्षक डॉ. अर्जुन सिंह को “लोकायुक्त-दोषी”…

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लोकायुक्त प्रकरण में दोषी पाए जाने का आरोप, नियम विरुद्ध प्रभार देने पर उठे सवाल।

दतिया। शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय दतिया में अधीक्षक (Superintendent) पद को लेकर बुधवार को बड़ा प्रशासनिक विवाद खड़ा हो गया।

कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सकों ने एकजुट होकर डीन के नाम विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें वर्तमान अधीक्षक डॉ. अर्जुन सिंह को “लोकायुक्त-दोषी” बताते हुए तुरंत हटाने की मांग की गई है। इस कदम ने संस्थान के भीतर माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है।

नियमों के विरुद्ध प्रभार देने का आरोप, ज्ञापन में डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि डॉ. अर्जुन सिंह को अधीक्षक का प्रभार केवल “कार्य सुविधा” के नाम पर दिया गया, जबकि शासन के नियमों के अनुसार अधीक्षक पद की प्रभार-स्वीकृति का अधिकार केवल चिकित्सा शिक्षा आयुक्त के पास है।

चिकित्सकों के अनुसार, बिना सक्षम अनुमति के दिया गया यह प्रभार न केवल प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन है, बल्कि कॉलेज की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।

लोकायुक्त प्रकरण का हवाला, विभागीय समिति ने पाया था दोषी, डॉक्टरों ने अपने ज्ञापन में में और संबंधित दस्तावेजों का उल्लेख करते हुए बताया कि डॉ. अर्जुन सिंह के विरुद्ध लोकायुक्त प्रकरण क्रमांक 0344/ई./2021-22 में जांच के दौरान विभागीय समिति ने उन्हें दोषी पाया था।

इसके आधार पर डीन कार्यालय ने उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही भी की थी, शासन के परिपत्र दिनांक 05 अगस्त 2023 के अनुसार ऐसे अधिकारियों को संवेदनशील पदों से दूर रखने का स्पष्ट निर्देश है।

इसके बावजूद डॉ. अर्जुन सिंह को अधीक्षक पद से पृथक नहीं किया गया, जिससे नाराजगी और बढ़ गई है। नीति-निर्माण से जुड़े प्रस्तावों पर भी आपत्ति, डॉक्टरों ने यह गंभीर प्रश्न उठाया कि एक दंडित अधिकारी द्वारा नीति एवं प्रशासनिक निर्णयों से जुड़े प्रस्ताव भेजना उचित नहीं है।

उनका आरोप है कि, डॉ. अर्जुन सिंह द्वारा भेजे जा रहे प्रस्तावों के आधार पर,डीन कार्यालय में डॉक्टरों के वेतन काटने, और अनुशासनात्मक कार्रवाई जैसे कदम उठाए जा रहे हैं, डॉक्टरों के अनुसार, यह न केवल शासन की मंशा के प्रतिकूल है, बल्कि संस्थान की गरिमा को भी ठेस पहुंचाता है।

संस्था की छवि और कानून-व्यवस्था पर प्रश्न, वरिष्ठ चिकित्सकों का कहना है कि “लोकायुक्त-दोषी” व्यक्ति को अधीक्षक जैसे महत्वपूर्ण पद पर बैठाए रखना: मेडिकल कॉलेज की संस्थागत छवि को नुकसान पहुंचाता है, प्रशासनिक निष्पक्षता को प्रभावित करता है, और छात्रों व कर्मचारियों के बीच गलत संदेश देता है।

योग्य और स्वच्छ छवि वाले चिकित्सक की नियुक्ति की मांग, ज्ञापन में यह स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि डॉ. अर्जुन सिंह को तत्काल प्रभाव से अधीक्षक पद से हटाते हुए किसी योग्य, सक्षम और स्वच्छ छवि वाले अधिकारी को विधिसम्मत प्रक्रिया से प्रभार सौंपा जाए। ”डॉक्टरों ने यह चेतावनी भी दी है कि यदि डीन कार्यालय द्वारा इस पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो वे मजबूर होकर मामले को वरिष्ठ कार्यालय और शासन स्तर तक ले जाएंगे।

ज्ञापन सौंपने वाले डॉक्टर, ज्ञापन सौंपने वालों में मेडिकल कॉलेज के 20 से अधिक वरिष्ठ चिकित्सक शामिल थे, जिनमें प्रमुख हैं, डॉ. दीपक यादव, डॉ. पुनीत अग्रवाल, डॉ. के.एन. आर्य, डॉ. चंद्रवर्मन सिंह, डॉ. निधि अग्रवाल, डॉ. मनीष सचान,डॉ. राजेश सिंह, डॉ. हेमंत जैन, डॉ. मनोज त्यागी, डॉ. मुकेश सिंह राजपूत, जितेंद्र कंजौलिया, डॉ. राजेश बादल, डॉ. आदित्य गोयल,डॉ. बाशुदेव शर्मा, डॉ. संदीप श्रीवास्तव, डॉ. उमेश पटेल,डॉ. धीरेश जायसवाल, डॉ. आशीष तिवारी, डॉ. मनोज शर्मा,डॉ. सुरेंद्र सिंह कंसाना, डॉ. मनीष वर्मा।

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