कैलाश मण्डेला का गीत ‘आडावल गीत’ बने डॉ.गर्ग
शाहपुरा-राजेन्द्र खटीक। शाहपुरा-साहित्य सृजन कला संगम के सचिव, अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवि एवं साहित्यकार डॉ.कैलाश मण्डेला की ताज़ा रचना “आडावळ अरड़ावे” जो वर्तमान में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही को बाल साहित्य के जाने-माने विद्वान तथा वरिष्ठ साहित्यकार एवं बाल वाटिका के सम्पादक डॉ.भेरूं लाल गर्ग ने कालजयी बताते हुए अरावली पर्वतमाला संरक्षण क्रांति का शीर्षक गीत बताते हुए इस गीत को ‘आडावल-गीत’ बनाने की संस्तुति की है।
उन्होंने कहा कि ‘अरडा़वे आडा़वल’ गीत अत्यंत मार्मिक, मर्मस्पर्शी, हृदयतल को गहराई से प्रभावित करने वाला , संस्कृति के समस्त पक्षों को छूनेवाला, काव्यकौशल की पराकाष्ठा व्यंजित करने वाला, दायित्वबोध का अप्रतिम उदाहरण प्रस्तुत करने वाला, अत्यंत संप्रेषणीय, मनमोहक और अंतश्चेतना को भीतर तक झकझोर कर रख देने वाला अत्यंत श्रेष्ठ गीत है।
मैं इस गीत को ‘अरावली – संरक्षण’ क्रांति के सूत्रपात का काव्य जगत की ओर से ‘आडा़वल गीत’ स्वीकार करने की संस्तुति करता हूँ।इस अभियान से जुड़े अवसर पर इसे व्यापक रूप से प्रस्तुत कर जन – जन को अपनी भावना और कृतज्ञता से अवगत करा सकते हैं।
आडा़वल एक तरह से राजस्थान के समस्त जीव – जगत की जीवन रेखा है। जीवन का मूल आधार है। ऐसे जीवन – रक्षक आधार को विनाश के गर्त में ढकेलने का कुत्सित प्रयास निश्चित ही अत्यंत निंदनीय है। आपका यह गीत इस विचार का संवाहक बन अरावली को बचाने में हमें सफलता प्रदान करे, मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ।
सच कहूँ, इस गीत को सुनते हुए मेरी आँखें भर आयीं हैं। इसी परिप्रेक्ष्य में संस्कृत भाषा के प्रतिष्ठित विद्वान डॉ हरमल रेबारी ने इस गीत के प्रभाव को रेखांकित करते हुए बताया कि यह गीत अरावली और प्रकृति के प्रति सहृदयी सामाजिकों के हृदय को झंकृत करके मुखरित करने का निमित्त बनना चाहिए।
देश भर के जागरुक एवं महत्वपूर्ण व्यक्तियों की प्रतिक्रियाएं इस गीत के सामयिक महत्व को रेखांकित कर रही है। कवि दिनेश बंटी ने इसे कालजयी रचना बताया वहीं वरिष्ठ शिक्षाविद् रमेश चंद्र गालरिया ने कहा कि ऐसा रचना कर्म महाकवि ही कर सकता है।
अरावली पर्वत के निरंतर दोहन और हाल ही में पर्वत की ऊंचाई को लेकर आए निर्णय ने हर व्यक्ति को चिंतित कर दिया है। सामाजिक सरोकारों पर चालीस वर्षों से निरंतर बेबाकी से कलम चलाने वाले जन कवि कैलाश मण्डेला की अनेक रचनाएं समय-समय पर लोक चेतना को जागृत करती रही है।
समाज और राष्ट्र के लिए कविता एवं साहित्य की भूमिका को स्वीकार करते हुए विविध विधाओं में उनके सैंकड़ों रचनाएं हैं जो शोध का विषय है। केन्द्रीय साहित्य अकादमी से पुरस्कृत डॉ. मण्डेला ने अरावली के संरक्षण को लेकर अपनी रचना में जिस आत्मीयता और दर्द के साथ अपनी प्रभावशाली आवाज में प्रस्तुति दी है जो सुनने योग्य है।

























