पण्डोखर धाम में वेद मंत्रों की गूंज से गुंजायमान हुआ वातावरण

महोत्सव में उमड़ा आस्था का सैलाब श्रीमद्भागवत कथा, श्रीराम महायज्ञ और भव्य सांस्कृतिक आयोजनों ने बांधा समां। दतिया। पण्डोखर धाम में आयोजित 30वें पण्डोखर धाम महोत्सव एवं श्रीराम महायज्ञ के दौरान रविवार का दिन पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा, श्रद्धा और भक्ति से सराबोर रहा। पण्डोखर धाम पीठाधीश्वर गुरु शरण महाराज के सानिध्य में प्रातःकाल से…

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महोत्सव में उमड़ा आस्था का सैलाब श्रीमद्भागवत कथा, श्रीराम महायज्ञ और भव्य सांस्कृतिक आयोजनों ने बांधा समां।

दतिया। पण्डोखर धाम में आयोजित 30वें पण्डोखर धाम महोत्सव एवं श्रीराम महायज्ञ के दौरान रविवार का दिन पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा, श्रद्धा और भक्ति से सराबोर रहा।

पण्डोखर धाम पीठाधीश्वर गुरु शरण महाराज के सानिध्य में प्रातःकाल से ही धाम परिसर वेद मंत्रों की पावन ध्वनि से गुंजायमान हो उठा। वातावरण में गूंजती मंत्रोच्चारण की स्वर लहरियों ने मानो पूरे ब्रह्मांड को आध्यात्मिक चेतना से भर दिया।सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु धाम पहुंचे और यज्ञशाला की परिक्रमा कर धर्म लाभ अर्जित किया।

महोत्सव के अंतर्गत आयोजित श्रीराम महायज्ञ में यज्ञाचार्य पं. उमाशंकर देवलिया जी के नेतृत्व में 151 विद्वान ब्राह्मणों ने विधिवत पूजन-अर्चन कराया, इस दौरान लगभग दो सैकड़ा से अधिक यजमानों ने यज्ञशाला में स्थापित विभिन्न देवी-देवताओं की पूजा कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

दोपहर बाद श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुतियां अर्पित कीं। आहुति के पश्चात यज्ञ भगवान की महाआरती का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें पीठाधीश्वर गुरु शरण महाराज, उनके अनुज रामकुमार उर्फ रामजी शर्मा सहित बड़ी संख्या में यजमानों एवं श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर पुष्पांजलि अर्पित की,आरती के दौरान पूरा वातावरण “जय श्रीराम” और “हरि बोल” के उद्घोष से गूंज उठा श्रीमद्भागवत कथा में नारी शक्ति का दिव्य स्वरूप हुआ वर्णित महोत्सव के अंतर्गत आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास पं. विनोद शास्त्री महाराज ने अनसूया चरित्र का विस्तार से वर्णन करते हुए नारी शक्ति, पतिव्रता धर्म

और त्याग की महिमा को रेखांकित किया,उन्होंने बताया कि सती अनुसूया, महर्षि अत्रि की धर्मपत्नी और कर्दम ऋषि की पुत्री थीं, जो अपने अद्वितीय सतीत्व के लिए जानी जाती हैं।

कथा के दौरान उन्होंने त्रिदेवों—ब्रह्मा, विष्णु और महेश—को बालक रूप में परिवर्तित कर उनकी सेवा करने की अद्भुत कथा सुनाई, जिससे उनकी मातृ शक्ति और तपस्या का परिचय मिलता है। कथा व्यास ने बताया कि माता लक्ष्मी, पार्वती और सरस्वती की परीक्षा के प्रसंग में अनुसूया ने अपने सतीत्व के बल पर त्रिदेवों को शिशु बना दिया और उनका पालन-पोषण किया।

अंततः देवियों द्वारा क्षमा याचना करने पर त्रिदेवों ने प्रसन्न होकर उनके घर दत्तात्रेय, दुर्वासा और चंद्र के रूप में अवतार लेने का वरदान दिया।उन्होंने आगे अजामिल कथा, जड़ भरत कथा एवं ध्रुव चरित्र का भी भावपूर्ण वर्णन किया, जिससे श्रोतागण भाव-विभोर हो उठे। कथा के दौरान प्रस्तुत सुमधुर भजनों ने माहौल को और अधिक भक्तिमय बना दिया।

समापन अवसर पर मुख्य परीक्षित मीरा देवी सतीश सोनी एवं उनके परिवार द्वारा श्रीमद्भागवत महापुराण की आरती की गई। इस दौरान आचार्य ड्रिवन चौबे एवं पं. अभिषेक रावत ‘चुटकुला महाराज’ के नेतृत्व में श्रद्धालुओं ने सामूहिक पुष्पांजलि अर्पित की।

भजन संध्या में झूमे श्रद्धालु, देर रात तक चला भक्ति संगीत का सिलसिला, महोत्सव के तहत शनिवार रात्रि आयोजित भजन संध्या ने श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। सांस्कृतिक मंच से भजन गायिका सौम्या बुधौलिया एंड ग्रुप तथा खनिज देव चौहान एंड ग्रुप ने एक से बढ़कर एक भजनों की प्रस्तुति दी।

देर रात तक चले इस कार्यक्रम में श्रोतागण भजनों पर झूमते नजर आए और पूरा वातावरण भक्ति संगीत से गुंजायमान रहा।आज और कल होंगे रासलीला, मयूर नृत्य और ब्रज की होली के भव्य मंचन, महोत्सव की श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए 6 एवं 7 अप्रैल को श्रीधाम वृंदावन से आए माही शर्मा एंड ग्रुप द्वारा रासलीला, मयूर नृत्य एवं ब्रज की होली का भव्य मंचन किया जाएगा।

इन प्रस्तुतियों को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। समग्र रूप से पण्डोखर धाम महोत्सव धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम बनकर उभर रहा है, जिसमें प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु भाग लेकर धर्मलाभ अर्जित कर रहे हैं।

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