चार जोड़ों ने लिए सात फेरे सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ दिया सशक्त संदेश
(बंटी गर्ग पत्रकार भिंड)
भिंड, सामाजिक समरसता, परंपराओं का संरक्षण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सहयोग की भावना के साथ आनंद विकास शिक्षा प्रचार समिति ने शनिवार को राम जानकी मंदिर, गोहद चौराहा (भिंड रोड) पर भव्य सर्वजातीय सामूहिक विवाह सम्मेलन का सफल आयोजन किया।
इस कार्यक्रम में क्षेत्र के चार जोड़ों का विवाह विधिपूर्वक संपन्न कराया गया, जिसके साथ ही उपस्थित जनसमूह ने समाज को एकजुट करने की दिशा में समिति के प्रयासों को सराहनीय बताया। गरिमामय वातावरण में हुआ नवदम्पतियों का स्वागतसुबह से ही विवाह स्थल को फूल-मालाओं, शुभ-लाभ के प्रतीकों और रंग-बिरंगी सजावट से सजाया गया था।
वातावरण में मंगल ध्वनि, वैदिक मंत्रोच्चारण और शहनाई की मधुर धुनें गूँज रही थीं।जब वर–वधु मंडप में पहुँचे, तो उपस्थित लोगों ने पुष्पवर्षा कर उनका भव्य स्वागत किया। एक–एक करके सभी चार जोड़ों ने परंपरागत ढंग से जयमालाओं का आदान–प्रदान किया और सात फेरे लेकर जीवन के नए सफर की शुरुआत की।
कार्यक्रम में शामिल हुए विशिष्ट अतिथिकार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रशांत आर्य, प्रमोद कामत (पार्षद), मुनेश तोमर (पार्षद), दिनेश बौद्ध (प्रदेश सचिव, आनंद समिति)तथा लालाराम चौरसिया सम्मिलित हुए। इन सभी अतिथियों ने नवदम्पतियों को आशीर्वाद देते हुए समिति के इस पुन्य कार्य की सराहना की।
मुख्य अतिथियों द्वारा सभी जोड़ों को उपहार एवं विवाह प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। ‘सामूहिक विवाह सम्मेलन समाज में नई दिशा दिनेश बौद्धइस अवसर पर प्रदेश सचिव दिनेश बौद्ध ने संबोधित करते हुए कहा कि सामूहिक विवाह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज में फैली कुरीतियों के खिलाफ एक मजबूत आंदोलन है।
उन्होंने कहाआज भी कई गरीब परिवार दहेज की वजह से कर्ज के बोझ तले दब जाते हैं। सामूहिक विवाह जैसी पहलें ऐसे परिवारों को बड़ी राहत देती हैं। यह परंपराओं को सरल, सुलभ और सम्मानजनक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।उन्होंने समाज के सभी वर्गों से आग्रह किया कि गरीबी, दहेज प्रथा, अनावश्यक खर्च और दिखावे की प्रवृत्ति को रोकने के लिए ऐसे आयोजनों को व्यापक सहयोग दिया जाए।
समिति का उद्देश्य: हर वर्ग को समान अवसरआयोजन समिति के सदस्य लालाराम चौरसिया ने बताया कि आनंद विकास शिक्षा प्रचार समिति पिछले कई वर्षों से शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, महिला सशक्तिकरण और सामूहिक विवाह जैसे जनहित के कार्यक्रम आयोजित करती है।
उन्होंने कहा कि समाज में अनेक परिवार ऐसे होते हैं जो आर्थिक तंगी के कारण अपने बच्चों का विवाह भव्य रूप से नहीं कर पाते। समिति ऐसे परिवारों के लिए बिना किसी जातिगत भेदभाव के सर्वजातीय सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित करती है ताकि हर वर्ग को समान अवसर मिल सके।
वर–वधु और परिजनों में खुशी की लहरकार्यक्रम में शामिल सभी जोड़ों और उनके परिजनों के चेहरों पर उत्साह और संतोष साफ दिखाई दे रहा था। विवाह आयोजन में किसी भी प्रकार की आर्थिक बाधा न होने से परिवारों ने समिति का धन्यवाद व्यक्त किया।
वधुओं ने अपनी सखियों के संग रंग-बिरंगे परिधान पहनकर पारंपरिक रस्में निभाईं, वहीं वर पक्ष की ओर से भी माता–पिता और परिजनों ने समिति के इस प्रयास की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में एक नई चेतना ला सकते हैं।
सामाजिक एकता का अद्भुत उदाहरणइस सामूहिक विवाह कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि समाज में एकता, भाईचारा और सहयोग की भावना से बड़े से बड़ा कार्य सहजता से सम्पन्न हो सकता है।
कार्यक्रम में हिंदू, बौद्ध, ओबीसी, अनुसूचित जाति, पिछड़े वर्ग एवं सामान्य वर्ग के लोग एकत्र होकर नवदम्पतियों को आशीर्वाद देने पहुंचे। यह दृश्य सामाजिक समरसता का प्रतीक था, जहाँ जाति, वर्ग और आर्थिक स्थिति का कोई भेदभाव नहीं दिखा।
सरल विवाह समाज के लिए अनुकरणीय पहलसमिति के पदाधिकारियों ने बताया कि सामूहिक विवाह से अनावश्यक खर्च समाप्त होता है और समाज में सादगीपूर्ण विवाह की प्रेरणा मिलती है।
आज के समय में बढ़ते खर्चों, दहेज प्रथा और दिखावे ने विवाह समारोहों को बोझिल और कठिन बना दिया है। ऐसे में सामूहिक विवाह सम्मेलन न केवल आर्थिक दृष्टि से सहायक है, बल्कि सामाजिक बदलाव का मार्ग भी प्रशस्त करता है।अगले माह 28 दिसंबर को होगा बड़ा आयोजन
समिति ने घोषणा की कि आगामी 28 दिसंबर को एक और सर्वजातीय सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें अनेक जोड़ों के विवाह कराए जाएंगे।समिति ने अधिक से अधिक जरूरतमंद परिवारों से इस कार्यक्रम में पंजीकरण कराने की अपील की है।








