मध्यप्रदेश समाज

बिहारी जी मंदिर में सुरों से सजी शाम, स्व. शिवम गोस्वामी को दी गई संगीतमय स्वरांजलि समीर भालेराव अखिल भारतीय संगीत साधक सम्मान से सम्मानित।

दतिया। स्थानीय ठाकुर श्री बिहारी जी मंदिर के प्रांगण में शनिवार की रात सुरों और ताल के अनूठे संगम की साक्षी बनी। अवसर था युवा संगीत कलाकार स्व. शिवम गोस्वामी की स्मृति में आयोजित स्वरांजलि कार्यक्रम का, जहां शहर के प्रतिष्ठित और युवा कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से उन्हें याद किया।

देर रात 12 बजे तक चले इस गरिमामय आयोजन में शास्त्रीय संगीत से लेकर सुगम संगीत और गजलों की अविरल धारा बही। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में जिला कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े उपस्थित रहे, जबकि अध्यक्षता राज परिवार के सदस्य महाराजा अरुणादित्य सिंह जू देव ने की।

इस अवसर पर अतिथियों द्वारा प्रख्यात संगीतकार समीर भालेराव को उनके संगीत के प्रति समर्पण के लिए अखिल भारतीय संगीत साधक सम्मान से नवाजा गया। स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका अभिनंदन किया गया। सम्मान के पश्चात समीर भालेराव ने अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए राग बाचस्पति में दो उत्कृष्ट प्रस्तुतियां दीं।

उन्होंने कमल नयन वारो श्याम और छेड़ो न मोहे श्याम सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। उनके साथ गायन में आकाश नगेले, हरमोनियम पर सोमेश्वर त्रिपाठी, तबला पर विजय सेठ, पैड पर कमल मोरयानी और की बोर्ड पर नीरज पाराशर ने बखूबी साथ निभाया।

सरस्वती वंदना से हुआ कार्यक्रम का आगाज शनिवार की शाम तेज हवाओं और बारिश के कारण कार्यक्रम अपने निर्धारित समय से लगभग दो घंटे देरी से शुरू हुआ, लेकिन श्रोताओं का उत्साह कम नहीं हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत युवा गायिका मुस्कान अग्रवाल ने सरस्वती वंदना से की।

विजय शंकर भट्ट द्वारा रचित सरस्वती मातंगिनी बागेश्वरी मां ज्ञान दे की प्रस्तुति उन्होंने रूपक ताल में दी। इसके पश्चात जिंदगी का सफर है ये कैसा सफर जैसे गीतों ने माहौल में गंभीरता घोल दी।

गजलों और गीतों से याद आए शिवम गोस्वामी स्व. शिवम गोस्वामी को याद करते हुए शहर के कई दिग्गज और युवा कलाकारों ने अपनी भावनाएं गीतों के माध्यम से व्यक्त कीं।

मनीष श्रीवास्तव ने अकेले हैं चले आओ जहां हो गाकर अपनी श्रद्धांजलि दी, तो सौरभ राव ने बने थे दोस्त दिल दुखाने को गीत पेश किया। पं. नीरज पाठक ने गीतों के एक फिल्मी गीतों और गजलों के मिश्रण के जरिए समां बांधा। शिवम गोस्वामी से संगीत की शिक्षा लेने वाले उनके छात्रों ने भी मंच संभाला।

गायक मुरली सोनी और राधिका पाठक की प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। उन्होंने नाम गुम जाएगा, इक प्यार का नगमा है, रहें न रहें हम और उस मोड़ से शुरू करें फिर ये जिंदगी जैसे कालजयी गीतों के माध्यम से अपने गुरु को याद किया। इस दौरान कीबोर्ड पर संचित खरे, ढोलक पर शिवम वंशकार और तबला पर शिवम श्रीवास्तव ने सहयोग किया।

इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति कार्यक्रम का सफल संचालन मनिंदर सिंह और कपिल मुड़िया ने किया। इस संगीतमय आयोजन में नमन गोस्वामी, राजीव शुक्ला, टीआई धीरेंद्र मिश्रा, डॉ. हेमंत जैन, प्रशांत दांगी, पुनीत टिलवानी, अनूप चतुर्वेदी, ऋषिराज मिश्रा, रवि ठाकुर, अवधेश नायक,

मुकेश मुड़ोतिया, अमित दीक्षित, शुभ गुप्ता, बृजमोहन शर्मा, अजय शुक्ला, नीरज गुप्ता, कमलाकांत तिवारी और सिद्धांत भट्ट सहित बड़ी संख्या में संगीत प्रेमी और प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे। इसके अलावा नवनीत शर्मा, रवि भूषण खरे, बीपी सेन और पंकज बसेडिया ने भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति और प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को सफल बनाया।

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