पर्यावरण संरक्षण से लेकर बाल दान तक-नन्हीं श्रेया बन गई समाज में बदलाव की प्रेरक आवाज़
बाल दिवस पर संवेदना, सेवा और संस्कार का प्रतीक बनी नन्हीं पर्यावरण प्रेमी श्रेया कुमावत
शाहपुरा-राजेन्द्र खटीक। शाहपुरा-बाल दिवस विशेष पर-बड़ी सोच उम्र की मोहताज नहीं होती इसी बात को सच साबित किया है शाहपुरा की नन्हीं पर्यावरण प्रेमी ग्रीन लिटिल बेबी नाम से राजस्थान की प्रशिद्ध श्रेया कुमावत नेजो हर वर्ष बाल दिवस पर अपने बाल इनोवेटिव हेल्पिंग हेड सोसाइटी जयपुर को दान करती हैं ताकि संस्था के माध्यम से वे कैंसर पीड़ित बच्चों के लिए नया आत्मविश्वास और मुस्कान बन सकें। श्रेया का यह छोटा सा कदम अब बड़ा अभियान बन चुका है।

उनके इस कार्य से प्रेरित होकर इस वर्ष उनकी माँ संतरा कुमावत (शिक्षिका) और सहपाठी मुस्कान नायक ने भी बाल दान कर इस सेवा भाव को आगे बढ़ाया। संवेदना से सेवा तक का सफरश्रेया का मानना हैएक मुस्कान लौटाना, जीवन का सबसे बड़ा उपहार है। उनका यह भाव केवल बाल दान तक सीमित नहीं है।
वे पर्यावरण संरक्षण, भारतीय देशी वनस्पति बीज संग्रह, प्लास्टिक रीसायकल से पौधारोपण और पशु पक्षी सरक्षण जहर मुक्त खेती जैविक खेती को बढ़ावा देने जैसे अभियानों में भी सक्रिय हैं।उनकी पहल ने बच्चों और युवाओं को यह सिखाया है किसंवेदना, सेवा और सकारात्मक सोच से समाज में बदलाव लाया जा सकता है।
आज जब युवा पीढ़ी अपने सपनों की दौड़ में व्यस्त है,श्रेया का यह कार्य याद दिलाता है कि किसी का दर्द बाँटना ही असली सफलता है। उनकी प्रेरणा से अब अनेक बच्चे बाल दान और सामाजिक कार्यों में जुड़ रहे हैं। श्रेया का संदेश स्पष्ट हैहर बाल दिवस सिर्फ उत्सव नहीं, सेवा का पर्व होना चाहिए।
हेल्पिंग हेड सोसाइटी जयपुर की संस्थापक एवं डायरेक्टर हिमांशी गहलोत ने श्रेया के निरंतर बाल दान कार्य की प्रशंसा करते हुए कहा कि आज के समय में समाज को ऐसे ही संवेदनशील और जागरूक बच्चों की आवश्यकता है, जो छोटी-छोटी पहल के माध्यम से बड़ा बदलाव ला सकें।
श्रेया का यह मानवीय योगदान अन्य बच्चों और युवाओं के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है। समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की उनकी यह सोच वास्तव में सराहनीय है, और हम उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं।”








