पत्रकारिता पर बुरी नजर: क्या सत्ता को रास नहीं आ रहे सच्चे पत्रकार?
लेखक संजय सोलंकी मध्यप्रदेश। भारतीय लोकतंत्र की नींव में पत्रकारिता एक मजबूत स्तंभ है, जो सत्ता की जवाबदेही सुनिश्चित करती है और जनता की आवाज बनती है। लेकिन हाल के वर्षों में, विशेष रूप से 2025 में, पत्रकारिता पर खतरे…
उपेक्षा की वजह से अपने ही देश में पराया आयुर्वेद ..!!
आज हम उससे बहूत दूर निकल चुके है तथा आज बीमारियों से जकड़े हुए..!! एक समय था जब देशी दवाओं से इलाज होता था और मरीज ठीक भी हो जाते थे जब उस समय इतने कैंसर के मरीज भी नही…

