Tag: #सोशल_मीडिया
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पत्रकारिता पर बुरी नजर: क्या सत्ता को रास नहीं आ रहे सच्चे पत्रकार?
लेखक संजय सोलंकी मध्यप्रदेश। भारतीय लोकतंत्र की नींव में पत्रकारिता एक मजबूत स्तंभ है, जो सत्ता की जवाबदेही सुनिश्चित करती है और जनता की आवाज बनती है। लेकिन हाल के वर्षों में, विशेष रूप से 2025 में, पत्रकारिता पर खतरे बढ़ते जा रहे हैं। विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक 2025 के अनुसार, भारत में पत्रकारों पर…
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लौटना ही होगा; रील से रियल की ओर!
लेख। आज का समय सूचना और तकनीक का समय है। मोबाइल और इंटरनेट ने जीवन को बदल दिया है। पहले लोग सुबह उठकर अख़बार पढ़ते थे,आपस में बैठकर चर्चा करते थे, वास्तविक जीवन के अनुभवों से सीखते थे। गाँव-शहर के चौपाल और मोहल्लों की बैठकों में विचार-विमर्श होता था। उस दौर में रिश्तों का महत्व…
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