रास्ता न होने के कारण शव को अंतिम संस्कार ले जाने पर रोक की सूचना मिलने पर उप जिलाधिकारी ने तहसीलदार को भेजा आश्वासन पर प्रदर्शन समाप्त के बाद शव का अंतिम संस्कार।
कुशीनगर रामकोला नगर पंचायत के वार्ड नंबर 5, चित्रगुप्त नगर धुआंटिकर की दलित बस्ती में कुछ लोगों द्वारा रास्ता बंद किए जाने से आक्रोशित ग्रामीणों ने रविवार रात से सोमवार सुबह तक शव रखकर करीब 12 घंटे तक प्रदर्शन किया।
इसकी सूचना किसी ने उप जिलाधिकारी कप्तानगंज को दे दिया उन्होंने मौके पर तहसीलदार को भेज कर मौके पर पहुंचे और आश्वासन के बाद मामला शांत कराया।
जानकारी के अनुसार, तीन वर्ष पूर्व गांव के ही गंगेश ने दलित बस्ती का पुराना रास्ता बंद कर दिया था। उस समय उन्होंने बगल से नया मार्ग देने का वादा किया था, लेकिन बाद में पीछे हट गए।
इसके चलते बस्ती के बेचू, श्रीराम, जयराम, हरेराम, कलकराज, रामदरश, कतवारू, रामप्यारे, संजय सहित दर्जनों दलित परिवारों को अब तक एक संकरी गली से होकर आना-जाना पड़ रहा है, जहां से न तो शव निकल पाते हैं और न ही कोई वाहन।
रविवार की देर शाम बस्ती की 35 वर्षीय रिंकी देवी पत्नी बेचू की तबीयत बिगड़ने पर परिजन उन्हें अस्पताल ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। इससे आक्रोशित ग्रामीणों ने सोमवार भोर से ही बंद मार्ग के सामने शव रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया और रास्ता खोलने की मांग पर अड़े रहे।
सूचना पर उपनिरीक्षक श्यामलाल निषाद, राजस्व निरीक्षक राधेश्याम मणि और हल्का लेखपाल मौके पर पहुंचे, लेकिन ग्रामीणों से वार्ता असफल रही। बाद में तहसीलदार कप्तानगंज चंदन शर्मा और थाना प्रभारी राजप्रकाश सिंह मौके पर पहुंचे।
उन्होंने निरीक्षण के बाद ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि रास्ता खुलवाया जाएगा। तहसीलदार ने कहा,जहां घर है, वहां रास्ता भी होगा यह आपका मौलिक अधिकार है। अधिकारियों के भरोसे पर ग्रामीण शांत हुए और प्रदर्शन समाप्त कराकर मृतका का अंतिम संस्कार हुआ।








