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यूपी/अयोध्या । प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण देने की मांग – चन्द्रशेखर आज़ाद, ओबीसी की जातिवार जनगणना न कराने पर केंद्र सरकार की आलोचना

उत्तरप्रदेश। अयोध्या में आयोजित “अस्तित्व बचाओ–भाईचारा बनाओ” प्रबुद्ध जनसम्मेलन में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। इस सम्मेलन में ओबीसी की जातिवार जनगणना, आरक्षण और संविधान की रक्षा, EVM प्रणाली के प्रभाव, दलित और पिछड़े वर्गों पर अत्याचार, प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण, और मंडल कमीशन की सिफारिशों के क्रियान्वयन जैसे विषयों पर जोर दिया गया।

मुख्य बिंदु:-

ओबीसी की जातिवार जनगणना: केंद्र सरकार पर ओबीसी की जाति आधारित जनगणना न कराने का आरोप लगाया गया, जिसे सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ बताया गया।

आरक्षण और संविधान: वर्तमान शासन व्यवस्था पर आरक्षण को निष्प्रभावी करने और संविधान की मूल भावना को कमजोर करने का आरोप लगाया गया।

EVM प्रणाली: EVM के माध्यम से चुनाव कराने को लोकतंत्र की पारदर्शिता और जनविश्वास के विरुद्ध बताया गया।

दलित और पिछड़े वर्गों पर अत्याचार: अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग और मुस्लिम समाज पर अत्याचारों में वृद्धि को चिंताजनक बताया गया।

प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण: प्राइवेट सेक्टर में भी आरक्षण देने की मांग की गई ताकि समावेशी विकास सुनिश्चित किया जा सके।

मंडल कमीशन की सिफारिशें: मंडल कमीशन की सिफारिशों को पूर्ण रूप से लागू करने की मांग की गई ताकि सामाजिक न्याय स्थापित किया जा सके।

इस सम्मेलन में सामाजिक न्याय, समानता, और लोकतंत्र की रक्षा के लिए एकजुट होने का आह्वान किया गया।सरकार की मंशा को लेकर कई सवाल उठाए जा सकते हैं। कुछ संभावित बिंदु जिन पर चर्चा हो सकती है:

1. ओबीसी की जातिवार जनगणना: सरकार की मंशा क्या है जो ओबीसी की जाति आधारित जनगणना नहीं करा रही है? क्या यह वास्तव में सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है?

2. आरक्षण और संविधान: सरकार की मंशा क्या है जो आरक्षण को निष्प्रभावी करने की कोशिश कर रही है? क्या यह संविधान की मूल भावना के अनुरूप है?

3. EVM प्रणाली: सरकार की मंशा क्या है जो EVM प्रणाली को बढ़ावा दे रही है? क्या यह वास्तव में लोकतंत्र की पारदर्शिता और जनविश्वास के विरुद्ध है?इन बिंदुओं पर चर्चा करके हम सरकार की मंशा को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं और सामाजिक न्याय, समानता, और लोकतंत्र की रक्षा के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं

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