भीलवाड़ा में पहली बार 108 वाणी पाठ एवं 108 भागवत मूल पाठ का आयोजन

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13 सितम्बर से हमारी भाषा व आचरण बता देते हमारा खानदान व संस्कार-आचार्य रामदयाल जी महाराजमाणिक्यनगर रामद्वारा धाम में दैनिक चातुर्मासिक सत्संगशाहपुरा (भीलवाड़ा)-राजेन्द्र खटीक।भीलवाड़ा।

भारतीय संस्कृति अर्चना की संस्कृति है, हमारे यहां नदी, वृक्ष ओर नाग तक की पूजा होती है। भारतीय वैदिक संस्कृति जैसी उदार अन्य कोई संस्कृति नहीं हो सकती जहां नाग को भी दूध पिलाया जाता है। अपना जीवन भगवत अर्चना में समर्पित कर दे। जीवन में अर्चन भक्ति कर सके या न कर सके पर कभी भी अड़चन भक्ति मत करना। ये विचार अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाघीश्वर जगतगुरू आचार्य स्वामी श्री रामदयाल जी महाराज ने सोमवार को ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत नाग पंचमी पर सत्संग में व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि नौ भक्ति में पांचवे स्थान पर बताई गई अर्चन भक्ति मध्यममार्गी है। अर्चन भक्ति परमानंद की अनुभूति करा सकती है। हमारी भाषा व आचरण सदा अच्छे होने चाहिए। शब्दों से ही व्यक्ति के संस्कार एवं खानदान की पहचान हो जाती है। भाषा में मीठास के साथ सम्मान के भाव होने चाहिए। आचार्यश्री ने कहा कि नाग पंचमी पर हम नाग की पूजा करते तो ये भी ध्यान रखे कि नाग कभी नाग का बैरी नहीं होता पर इंसान इंसान को देखना पसंद नहीं करता।

तृष्णा व सपनों में भटक रहे आदमी की आंखों में आदमी ही खटक रहा है। दुर्जन की संगत से हमेशा बचना चाहिए क्योंकि बिच्छू की पूंछ में जहर होता है पर दुर्जन व्यक्ति के अंग अंग में जहर होता है। सर्प से ज्यादा जहर इंसान के अंदर दिख रहा है। हमारी नजर अच्छी चीजों पर नहीं बुरी पर ही जाती है। याद रखे इस कर्म जगत में कर्मो का फल तो भोगना ही पड़ेगा। सत्संग में आचार्य रामदयाल जी महाराज ने बताया

कि चातुर्मास के दौरान 13 से 19 सितम्बर तक भीलवाड़ा में पहली बार 108 वाणी पाठ एवं 108 भागवत मूल पाठ का एतिहासिक विराट आयोजन होगा। इसमें 108 वाणी पाठक बैठेंगे एवं निरन्तर वाणी पाठ करेंगे। ये सभी पाठक पुरूष श्रद्धालु होंगे जो भीलवाड़ा सहित देश के विभिन्न स्थानों से होंगे। इस अवधि में सुबह 8 से 11 बजे तक वाणीजी के प्रवचन होंगे। इस दौेरान दोपहर में 2 से 5 बजे तक श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन होगा।

इस दौरान 108 भागवत का मूल पाठ भी होगा। उन्होंने कहा कि स्वामी रामचरण जी महाराज की पावन भूमि पर उनकी कृपा से विश्व शांति चातुर्मास समिति द्वारा विश्व शांति एवं कल्याण की भावना से ये आयोजन किया जा रहा है। आचार्य श्री से पूर्व अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथराम जी आलोट ने मानस प्रवचन दिया। कुछ श्रद्धालुओं ने भी भजन की प्रस्तुति दी।

प्रवचन के विश्राम पर श्रद्धालुओं द्वारा आचार्यश्री रामदयाल जी महाराज की आरती की गई। सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। चातुर्मास में दैनिक सत्संग का समय सुबह 9 से 10 बजे तक है। रामधुनी के साथ सुबह 8.30 से 9 बजे तक वाणीजी का पाठ हो रहा है। सूर्यास्त के समय संध्या आरती एवं रामस्नेही सम्प्रदाय के युवा संत रामजस ईडर द्वारा भक्तमाल की कथा में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे है।

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