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नॉर्वे प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में नम्बर एक हैं, और भारत 157 पर”भारत में प्रेस की आज़ादी खतरे में “

प्रदीप कुमार नायक स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार जिस देश में भगत सिंह, सुगदेव ने कुर्बानी दी, और लाखों शहीद लोगों ने कुर्बानियां देकर देश को..

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प्रदीप कुमार नायक स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार

जिस देश में भगत सिंह, सुगदेव ने कुर्बानी दी, और लाखों शहीद लोगों ने कुर्बानियां देकर देश को आज़ाद करवाया l उस देश को सत्ता के चाटुकारिता करते हुए देश को बर्बाद कर दिया l शर्म करो, जो काम भारतीय पत्रकार को करना चाहिए था, वह काम नॉर्वे के एक महिला पत्रकार हेले लेंग ने कर दिखाया l

नॉर्वे की महिला पत्रकार ने मोदी से पूछा कि आप विश्व के सबसे फ्रीडम मीडिया से सवाल क्यों नहीं लेते ? उन्होंने पी एम से सवाल कर दिया कि आपके देश की मीडिया आज़ाद नहीं हैं l इस पर आप क्या कहना चाहते हैं ? आपने अपने कार्यकाल में एक भी प्रेस कांन्फ्रेंस नहीं किया l मोदी ने वहाँ जवाब दिए वैगर सर झुकाकर निकल गए l

यह काम हमारें देश के मीडिया कहें होते तो आज हम गर्व से कह सकते थे कि सवाल सत्ता से करते हैं l यह वह दलाल हैं जो बंगाल के चुनाव में झाल मुडी खाते हैं l कितनी चाटुकारिता करोगे l विदेशो में डंका बज रहीं हैं कि हमारे देश की मीडिया कितनी बिकाऊ और गिरी हुई हैं l

नॉर्वे के महिला पत्रकार हेला लेंग ने यह साबित किया कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ ने वहाँ लोकतंत्र को जिन्दा रखा हुआ हैं l सच कहूं तो, बेवकूफ़ जनता के लिए सब कुछ संभव हैं l लेकिन हम जागरूक नहीं होंगे l

भारत में सत्ता पक्ष द्वारा प्रेस की स्वतंत्रता के विरुद्ध रवैया अपनाने की शिकायते मिल रहीं हैं l यहाँ न्यूज़ मीडिया, खासकर प्रेस को सरकार के जबरदस्त दबाव में काम करना पड़ रहा हैं l देश में एक अघोषित किस्म की सेंसरशिप लगी हुई हैं l

जिसके कारण मुख्यधारा के अखबार और चैनल सरकार के बारे में कोई नकारात्मक खबरे छापने या दिखाने से परहेज करते हैं l देश के अधिकांश अखबारों और चैनलों ने इस अघोषित इमरजेंसी के आगे घुटने टेक दिए हैं l यह अभिव्यक्ति की आज़ादी की भावना के विरुद्ध हैं, और संविधान के सुचारु संचालन में बाधा डालने की तरह हैं l

यहीं नहीं, अखबारों चैनलों में महत्वपूर्ण जगहों और बोटो पर भक्त पत्रकारों को बैठाया गया हैं l यह अपेक्षाकृत एक नई परिघटना हैं l सरकार के प्रति समर्पित और नौकरशाही के बाद वफादार पत्रकारों – संपादकों का युग शुरु हो चुका हैं l

जाहिर हैं, इसके कारण देश में न्यूज़ मीडिया न सिर्फ अपनी पहरेदार ( वाचडांग ) की भूमिका को कुर्बान कर चुका हैं l बल्कि पाठकों – दर्शकों को वास्तविक और सही सूचनाएं देने से भी परहेज करने लगा हैं l आश्चर्य की बात हैं कि इसके कारण देश में न्यूज़ मीडिया की साख गिरी हैं l उसकी धारा कमजोर हुई हैं, और तेवर मंद पड़ गया हैं l

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल पूछने के बाद चर्चा में आई नॉर्वे की महिला पत्रकार हेला लेंग ने दावा किया हैं कि उनके फेसबुक और इंटाग्राम अकाउंट सस्पेंड कर दिए गए हैं l उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहाँ हैं कि दोनों अकाउंट अचानक बन्द हो गए, जिसके चलते वह लोगों को जवाब नहीं दें पा रहीं हैं l

हेला लेंग ने लिखा हैं कि मैं ज्यादा से ज्यादा भारतीय को जवाब देना चाहती थी l लेकिन अब देरी होगी l उम्मीद हैं कि मेरे अकाउंट वापस मिल जाएंगे l एक अन्य पोस्ट पर उन्होंने कहाँ हैं कि पूरे दिन इंस्टाग्राम अकाउंट में l

लॉग इन करने में दिक्कत आ रहीं थी, जिसके बाद अकाउंट सस्पेंड कर दिया गया l उन्होंने आगे लिखा कि प्रेस की आज़ादी के लिए यह चुकाई गई एक छोटी कीमत हैं l

विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में नॉर्वे पहले स्थान पर हैं, जबकि भारत 157 वें स्थान पर हैं, और फिलिस्तीन, अमीरात व रूस जैसे देशों के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहा हैं लिए

जिन शक्तियों के साथ हम सहयोग करते हैं, उनसे सवाल पूछना हमारा कर्तव्य हैं l जनता के सवाल मीडिया नहीं उठा रहीं l क्या भारत में प्रेस की आज़ादी खतरे में हैं ?

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