शाहपुरा (भीलवाड़ा)-राजेन्द्र खटीक। शाहपुरा-महाराणा प्रताप व पर्यावरण विषय पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद शाहपुरा की दसवीं मासिक गोष्ठी बाबू लाल चौहान के निवास पर हुई सम्पन्न।
गोष्ठी की अध्यक्षता तेजपाल उपाध्याय ने की। विशिष्ट अतिथि गोपाल लाल पंचोली व मुख्य अतिथि विष्णु दत्त शर्मा ‘विकल’ रहे।गोष्ठी की शुरुआत कैलाश जाड़ावत ने सरस्वती वंदना ‘मात शारदा रसना विराजो कविता की दातार’ से की।
कक्षा 4 की बालिका निहाली सिंह चौहान ने हनुमान चालीसा सुनाकर सभी को मन्त्रमुग्ध कर दिया। बालकृष्ण जोशी ‘बीरा’ ने ‘जीव जगत की रक्षा कर पर्यावरण बचाना है ‘ कविता के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया तथा राजस्थानी की शृंगारिक रचना ‘म्हारो साजन बहतो धोरो मैं पीवणी क्यारी’ सुनाकर श्रोताओं को मदमस्त कर दिया।
विष्णु दत्त शर्मा ‘विकल’ ने ‘टेड़ी श्वान पूछों का बल निकला जाएगा’ कविता से देश विरोधियों पर कड़ा व्यंग्य प्रहार किया। शंकर लाल जोशी ने ‘हरे घास री रोटी जद वन बिलावडो ले भाग्यो’ कन्हैया लाल सेठिया की रचना सुनाई। गोपाल लाल पंचोली ने ‘ज्यों ज्यों अंत:करण बिगड़ रहा है त्यों त्यों पर्यावरण बिगड़ रहा है’ कविता के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के संबंध मे मनुष्य की कथनी और करनी में अंतर को उजागर किया।
सोमेश्वर व्यास ने ‘लीला घोड़ा रा असवार म्हारा मेवाड़ी सरदार’ गीत सुनाया। आशुतोष सिंह सौदा ने ‘चेतक तेरी गौरव गाथा रण में अडिग हिमालय थी’ कविता सुनाकर गोष्ठी को चरम पर पहुंचा दिया। एडवोकेट दीपक पारीक ने ‘ना झुका जो कभी वह सितारा प्रताप था हर आंधी मे चमकता प्रताप था’ कविता के माध्यम से महाराणा प्रताप के शौर्य का बखान किया।
बाबू लाल चौहान ने महाराणा प्रताप के अंतिम समय के संघर्ष पर प्रकाश डाला। रवीन्द्र सिंह जाड़ावत ने ‘मेवाड़ी पगड़ी नहीं झुकी रिपु दमन प्रताप ने आन रखी’ कविता सुनाकर गोष्ठी को ओजमय कर दिया। तेजपाल उपाध्याय ने राजस्थानी में ‘खुशी की बात है वृक्षारोपण अभियान चालर्यो है’ व्यंग कविता से शाहपुरा में चल रहे कागजी वृक्षारोपण अभियान की पोल खोलकर रख दी।
ओम माली ‘अंगारा’ ने साहित्यिक रचना ‘प्रवाहित रक्त प्रवाह संग-संग भंग-अंग बहने लगे ‘ कविता सुनाकर महाराणा प्रताप के शौर्य और संघर्ष को रेखांकित किया। कैलाश सिंह जाड़ावत ने ‘चांदी मेवाड़ री माटी सोनो लागे हल्दी घाटी’ कविता सुनाकर मेवाड़ तीर्थ हल्दी घाटी के माहात्म्य का वर्णन किया तथा पर्यावरण रक्षण का संदेश देते हुए ‘सब मिल पेड़ लगाओ लोगों को समझाओ’ कविता सुनाई।
गोष्ठी में डॉ. परमेश्वर कुमावत ‘परम’ ने ‘मुग़ल मान मर्दन किया मेवाड़ी शमशीर ने’ कविता ऑनलाइन सुनाई। गोष्ठी में योगेंद्र शर्मा मथुरा से ऑनलाइन जुड़े और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। गोष्ठी की समीक्षा विष्णु दत्त शर्मा ‘विकल’ ने की।















