शाजापुर, 6 जुलाई 2026 मध्य प्रदेश के शाजापुर जिला मुख्यालय पर आज ‘म.प्र. आशा/आशा सहयोगिनी श्रमिक संघ’ के बैनर तले आशा कार्यकर्ताओं और आशा पर्यवेक्षकों (सुपरवाइजर्स) का गुस्सा फूट पड़ा। वेतन भुगतान में लगातार हो रही अनियमितताओं और वार्षिक वेतन वृद्धि रोके जाने के विरोध में आज पूरे प्रदेश के साथ-साथ शाजापुर में भी जोरदार प्रदर्शन किया गया।
प्रदर्शन के बाद संघ के पदाधिकारियों ने जिला कलेक्टर के माध्यम से सूबे के मुख्यमंत्री मोहन यादव और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की मिशन संचालिका के नाम एक शिकायती ज्ञापन सौंपा। जिला प्रशासन की ओर से तहसीलदार ने इस ज्ञापन को प्राप्त किया
मुख्य समाचार बिंदु: क्यों आक्रोशित हैं स्वास्थ्य विभाग की ये रीढ़?₹6,000 में परिवार चलाना नामुमकिन: आशा कार्यकर्ताओं ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि देश के कई राज्यों में आशाओं को ₹10,000 से अधिक का मानदेय दिया जा रहा है, लेकिन मध्य प्रदेश में उन्हें महज ₹6,000 मासिक पर काम करना पड़ रहा है।
इस कमरतोड़ महंगाई में इतने कम वेतन में परिवार का भरण-पोषण करना असंभव हो गया है।3-4 महीने तक रोका जाता है वेतन: ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि मिशन संचालिका के स्पष्ट निर्देश हैं कि हर महीने की 5 तारीख तक वेतन का भुगतान हो जाना चाहिए, लेकिन स्थानीय स्तर पर अधिकारी इस नियम की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
तीन-चार महीने तक वेतन रोककर रखा जाता है और बाद में बजट की कमी का हवाला देकर मनमानी कटौतियां की जाती हैं।
सालाना ₹1000 की वेतन वृद्धि रोकने का विरोध: कार्यकर्ताओं की मांग है कि उनकी रोकी गई ₹1000 की वार्षिक वेतन वृद्धि को एरियर (बकाया राशि) सहित तुरंत भुगतान किया जाए। साथ ही पर्यवेक्षकों के लिए ₹15,000 मासिक वेतन निर्धारण को पूरी तरह लागू किया जाए।
20 साल की सेवा के बाद भी शोषण: मैदानी स्तर पर मातृ शिशु मृत्यु दर को रोकने और स्वास्थ्य मिशन की योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने में ये कार्यकर्ता 24-24 घंटे सेवा देती हैं। विपरीत मौसम में भी काम करने के बावजूद, विभाग पिछले 20 वर्षों से उनकी समस्याओं को अनसुना कर रहा है।
संघ की चेतावनी: ‘जीने लायक वेतन’ दे सरकारश्रमिक संघ की प्रादेशिक नेतृत्व (प्रदेशाध्यक्ष श्रीमती लक्ष्मी कौरव एवं प्रदेश महामंत्री श्रीमती ममता राजावत) के निर्देश पर सौंपे गए इस ज्ञापन में साफ कहा गया है कि अधिकारियों द्वारा थोड़ी सी राशि का भुगतान करके यह कह दिया जाता है कि पूरा भुगतान हो गया, जो कि सरासर अन्याय है।
आशा कार्यकर्ताओं ने सरकार से मांग की है कि उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने के लिए एक सम्मानजनक और न्यूनतम ‘जीने लायक वेतन’ निर्धारित किया जाए।
तहसीलदार ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए प्रदर्शनकारियों को आश्वस्त किया है कि उनकी इन जायज मांगों को तुरंत ही राज्य शासन और मुख्यमंत्री कार्यालय तक भेज दिया जाएगा।
कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों का ठोस निराकरण नहीं हुआ, तो वे अपने आंदोलन को और उग्र करने के लिए बाध्य होंगी।















