संत का लक्ष्य सत्ता व संपति नहीं बल्कि परमात्मा की प्राप्ति करना है-

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आचार्य रामदयालजी महाराजजीवन में बहकना नहीं महकना हमारा लक्ष्य होना चाहिए,साधना ही संयम का आधारमाणिक्यनगर रामद्वारा धाम में दैनिक चातुर्मासिक सत्संग

शाहपुरा (भीलवाड़ा)-राजेन्द्र खटीक।भीलवाड़ा/

संसारी ओर संत में बड़ा अंतर होता है। कंचन कामिनी, सत्ता व संपति की तरफ दौड़ने वाला संसारी होता है।

सत्ता, शक्ति, संपति व सौन्दर्य जिसके पीछे दौड़े ओर वह मुड़कर भी नहीं देखे वह संत व साधक होता है। संसारी आंखे बंद करके जिनके पीछे दौड़ता है वह सब संत के पीछे दौड़ती है। संत का लक्ष्य सत्ता व संपति नहीं बल्कि परमात्मा की प्राप्ति करना होता है। संत सत्ता को संताप ओर संपति को विपत्ति मानता है जबकि संसारी सोचता है कि सत्ता से संताप ओर संपति से विपत्ति नष्ट हो जाएगी।

ये विचार अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाघीश्वर जगतगुरू आचार्य स्वामी श्री रामदयाल जी महाराज ने मंगलवार को ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत दैनिक सत्संग में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि अनुभवी कह गए है कि पाप ओर पारे को कोई पचा नहीं सकता। पारा किसी तरह कोई ग्रहण कर ले तो वह शरीर के किसी अंग को विर्दीण करके बाहर आ जाएगा ओर पाप की भी यहीं दशा होती उसे भी पचा नहीं सकते।

चंचल मन का चूहा राम नाम का पारा पी ले तो जाम हो जाता है। राम नाम की साधना से ही मन स्थिर होगा। साधना ही संयम का आधार है। आचार्य श्री ने मन की चंचलता पर चर्चा करते हुए कहा कि अपने मन को साधना सीख गए तो चातुर्मास सफल हो जाएगा। मन भौतिक संपदा से नहीं भक्ति से ही महकता है।

पानी के समान मन भी बहता है पर बहता मन बहकने लग जाए तो खतरनाक हो जाता है। जीवन में बहकना नहीं महकना हमारा लक्ष्य होना चाहिए। जीवन में सत्ता, संपति, सौन्दर्य, ज्ञान कोई भी उपलब्धि बहकने के लिए नहीं महकने के लिए है।

उन्होंने कहा कि बहकने का मतलब उपलब्धि को नहीं पचा पा रहे है जबकि महकने का मतलब है जो उपलब्धि पाई वह राष्ट्र एवं समाज को समर्पित है। संतों ने विराट चिंतन कर विशाल दृष्टि प्रदान की है।

जीना ओर मरना भी प्रकृति का अभिनव अभिनय है। इससे पूर्व रामस्नेही सम्प्रदाय के वरिष्ठ संत नरपत राम जी उदयपुर ने भी प्रवचन के माध्यम से धर्म संदेश प्रदान किया। सम्प्रदाय के कार्यवाहक भण्डारी संत जगवल्लभ राम जी ने भी सत्संग को सम्बोधित

किया। सत्संग में स्थानीय भण्डारी संत खुशीराम जी, संत गौतमराम जी, संत जयराम जी का भी सानिध्य प्राप्त हुआ।मंजू समदानी ने गुरुभक्ति का भजन सुनाया। प्रवचन के विश्राम पर झंवर परिवार संजय कॉलोनी के सदस्यों द्वारा आचार्य श्री रामदयाल जी महाराज की आरती की गई।

सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। चातुर्मास में दैनिक सत्संग का समय सुबह 9 से 10 बजे तक है। चातुर्मास में आचार्यश्री रामदयालजी महाराज के सानिध्य में प्रतिदिन सुबह 5 से 6 बजे तक रामधुनी के साथ सुबह 8.30 से 9 बजे तक वाणीजी का पाठ हो रहा है। सूर्यास्त के समय संध्या आरती में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे है।

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