मंदिर के नाम से धंधा चल रहा है श्रद्धालु हो रहे है परेशान
उज्जैन के प्रसिद्ध नागचंद्रेश्वर मंदिर में नागपंचमी के अवसर पर दर्शन व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की भारी लापरवाही को लेकर जनता में తీవ్ర आक्रोश देखा जा रहा है।
नागपंचमी के पावन पर्व पर महाकाल परिसर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं का तांता लग गया, लेकिन कुप्रबंध के कारण आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।मुख्य शिकायतें और लापरवाही के बिंदु:लंबी कतारें और घंटों इंतजार: श्रद्धालुओं का कहना है कि नागपंचमी की रात 12 बजे से ही लोग लंबी लाइनों में खड़े थे,
लेकिन सुबह 9 बजे तक भी कई लोगों को दर्शन नहीं मिल पाए।पुलिस-प्रशासन की अनुपस्थिति: कतारों में खड़े बुजुर्गों, महिलाओं और बहनों की सुध लेने वाला लाइन में एक भी पुलिसकर्मी मौजूद नहीं था। जनता घंटियों और धूप में अपनी बारी का इंतजार करती रही, जबकि प्रशासनिक मदद नदारद रही।
VIP कल्चर और भेदभाव: आम जनता घंटों लाइन में भूखे-प्यासे खड़ी रही, जबकि पुलिस प्रशासन द्वारा वीआईपी (VIP) लोगों को सीधे और सुगम दर्शन कराए जा रहे थे। आरोप है कि पुलिस और होमगार्ड के जवान अपनी मनमानी कर रहे हैं और आम जनता की तकलीफों से उन्हें कोई सरोकार नहीं है।पैसे लेकर प्रवेश के आरोप: जनता में इस बात को लेकर भी
भारी गुस्सा है कि वीआईपी दर्शन के नाम पर कथित तौर पर 300 रुपए जैसी बातें सामने आ रही हैं, जिससे गरीब और आम जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। आम आदमी के पास इन व्यवस्थाओं के लिए पैसे न होने के कारण उन्हें दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं।प्रशासन और एसपी उज्जैन की कार्यप्रणाली पर सवाल: जनता का आरोप है कि उज्जैन एसपी और स्थानीय प्रशासन की इस घोर लापरवाही के कारण हालात बेकाबू हुए।
आम जनता की चीख-पुकार और समस्याओं की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है, जिससे लोगों में व्यवस्था के प्रति गहरी नाराजगी है।नोट: नागपंचमी जैसे बड़े पर्व पर जहां देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं, वहां इस तरह की अव्यवस्था और वीआईपी संस्कृति का हावी होना प्रशासन की बड़ी चूक को दर्शाता है। जनता की मांग है कि इस मामले की उच्च स्तर पर जांच हो और जिम्मेदार अधिकारियों व लापरवाह पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।