मालनपुर ब्रह्माकुमारी आश्रम में गणेश उत्सव जोर-जोर से मनाया गया और भंडारा भी किया गया
कार्यक्रम में संचालिका ब्रह्माकुमारी ज्योति बहन ने कहा पूरे भारतवर्ष में भक्ति में मगन होकर हर भक्त श्री गणेश जी की अर्चना और पूजन में लगा हुआ है। हर एक के मन में यही विश्वास है की विघ्न विनाशक गणेश जी हमारे विघ्नों को खत्म करेंगे। हमें सफलता प्रदान करेंगे।
निश्चित है कोई कार्य विधि पूर्वक किया जाए तो सिद्धि तो मिलना ही है। इसलिए गणेश जी की दोनों पत्नियों है रिद्धि और सिद्धि, देखा जाए तो उनके हर अंग का कोई ना कोई एक आध्यात्मिक रहस्य है। बड़े कान अर्थात लोगों की ज्यादा सुनो और सूप की तरह उतनी ही बातों को अंदर में लो, जो आवश्यक है।
गणेश जी की छोटी-छोटी आंखें यही कहती हैं हमें दूरंदर्शी होकर कार्य करना चाहिए। वर्तमान समय का आनंद प्राप्त करने के चक्कर में कई बार हम संबंध खराब कर लेते हैं, लेकिन उसका भविष्य सही नहीं होता। इसलिए जो करें सोच समझकर करें। गणेश जी का बड़ा माथा यही कहता है हर प्रकार के ज्ञान में पराकाष्ठा होनी चाहिए।
भरपूर होना चाहिए। गणेश जी की लंबी सुंढ़ हमें यही बताती है कि हमें कार्यों में कुशलता लाना है। अच्छे बड़े-बड़े कार्य करके लोगों का कल्याण करना है। गणेश जी का बड़ा पेट यही कहता है हमें हर प्रकार की बात को समाना आना चाहिए।
गणेश जी मीठे को शौकीन कहते हैं, उनको लड्डुओं का भोग लगता है। इसका मतलब है अपनी वाणी को सदा मीठा रखें। चूहा कितना छोटा जंतु है लेकिन उसकी सवारी करते हैं, मतलब यही है कि हमें छोटी से छोटी परेशानियों से भी घबरा नहीं है।
बल्कि उन पर भी विजय प्राप्त करना है। गणेश जी की तो जितनी महिमा की जाए उतना कम है हमें भी श्री गणेश जी की सारी विशेषताओं को धारण करके अपने जीवन को विघ्न विनाशक बनाना है और परमात्मा शिव का ध्यान भी लगाना है।
जिस प्रकार गणेश जी ने अपने माता-पिता की परिक्रमा करके यही कहा की वही मेरे भगवान है, वही मेरे संसार है। मात-पिता की सेवा ही सर्वोपरि है। कार्यक्रम में अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए अनुभवी वक्ता ब्रह्माकुमार मोहनलाल वर्मा जी ने यही कहा, परमात्मा पर संपूर्ण विश्वास करेंगे तो सफलता अवश्य मिलेगी।
अमेठी कॉलेज की शिक्षिका सीता कुशवाहा एवं गीता बहन ने शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम में अपनी प्रमुख भूमिका निभाई सृष्टि, पूजा, खुशबू, प्रसाद, सुनील, संतोष महेश, और आने वाले सभी भक्तगणों ने गणेश जी की आरती की एवं भंडारा प्राप्त करके संतुष्ट का अनुभव किया। नन्हे मुन्ने बाल कलाकारों ने रंगारंग प्रस्तुति दी।

























