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संघ शताब्दी वर्ष में आरएसएस का कामद में विजयादशमी उत्सव पर भव्य आयोजन, निकाला संचलन।

आज बड़ी संख्या में देश के युवा एवं मातृशक्ति संघ से जुड़ रहे है, जो भारत को फिर से विश्वगुरु के रूप में प्रतिष्ठित करेगा- अविरल जी। उनाव। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जिला दतिया के खण्ड उनाव अंतर्गत कामद मण्डल में आज संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर विजयादशमी उत्सव का भव्य आयोजन किया गया।…

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आज बड़ी संख्या में देश के युवा एवं मातृशक्ति संघ से जुड़ रहे है, जो भारत को फिर से विश्वगुरु के रूप में प्रतिष्ठित करेगा- अविरल जी।

उनाव। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जिला दतिया के खण्ड उनाव अंतर्गत कामद मण्डल में आज संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर विजयादशमी उत्सव का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बौद्धिक, संघ प्रार्थना, एकल गीत, अमृत वचन, संचलन गीत एवं घोष वादन के साथ राष्ट्रभक्ति और संगठन भाव की अद्भुत झलक देखने को मिली।

कार्यक्रम में घोष वादकों की तालबद्ध प्रस्तुति ने पूरे स्थल को अनुशासन और ऊर्जा से भर दिया। कार्यक्रम स्थल पर सैकड़ों स्वयंसेवक गणवेश में उपस्थित रहे, जिन्होंने संघ परंपरा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। मुख्य वक्ता के रूप में जिला सहकार्यवाह श्री अविरल जी गुप्ता ने अपने बौद्धिक उद्बोधन में पंच परिवर्तन, संघ एवं भारत का गौरवशाली इतिहास विषय पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि संघ शताब्दी वर्ष आत्मगौरव, आत्मनिर्भरता और संगठन सशक्तिकरण का प्रतीक एवं पंच परिवर्तन का संकल्प वर्ष है।संघ शताब्दी वर्ष केवल उत्सव नहीं, यह पंच परिवर्तन का संकल्प वर्ष है। जब व्यक्ति का जीवन संघ के संस्कारों से जुड़ता है, तभी समाज और राष्ट्र में सकारात्मक परिवर्तन संभव होता है। संघ ने पिछले सौ वर्षों में संगठन, सेवा और संस्कार के माध्यम से भारत के समाज जीवन को नई दिशा दी है।

संघ का कार्य व्यक्ति निर्माण से प्रारम्भ होकर राष्ट्र निर्माण तक जाता है। संघ स्वयंसेवक का जीवन किसी पद या प्रसिद्धि के लिए नहीं, बल्कि मातृभूमि की सेवा के लिए समर्पित होता है।श्री गुप्ता ने संघ और भारत के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि संघ का इतिहास ही भारत के पुनरुत्थान का इतिहास है।

आज जब हम तकनीकी और भौतिक प्रगति के युग में है, तब भी राष्ट्र जीवन के केंद्र में संस्कृति, आचार और मूल्य होने चाहिए। यही संघ का संदेश है।युवा शक्ति राष्ट्र की धुरी है। आज वड़ी संख्या में देश के युवा एवं मातृशक्ति संघ से जुड़ रहे है, जो भारत को फिर से विश्वगुरु के रूप में प्रतिष्ठित करेगा।

बौद्धिक के पश्चात पथ संचलन का आयोजन किया गया, जो कामद के प्रमुख मार्गों शासकीय हाई स्कूल कामद , मुख्य सड़क,विभिन्न मुहल्लों से होते हुए निकला। घोष की मधुर ध्वनियाँ और स्वयंसेवकों की सुसंगठित पंक्तियाँ लोगों के आकर्षण का केंद्र रहीं। ग्रामवासियों ने पुष्प वर्षा कर स्वयंसेवकों का स्वागत किया।

पथ संचलन के माध्यम से अनुशासन, संगठन और सेवा भावना का सजीव प्रदर्शन हुआ। बाल स्वयंसेवकों से लेकर वरिष्ठ स्वयंसेवक तक, सभी ने शताब्दी वर्ष को गौरवपूर्ण बनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्वयंसेवक, नागरिक एवं बाल स्वयंसेवक सम्मिलित हुए। सभी ने संघ के आदर्शों और राष्ट्रसेवा की भावना को नमन किया।

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