मध्य प्रदेश शासन के माननीय मुख्यमंत्री को आज एक विस्तृत ज्ञापन प्रस्तुत किया गया, जिसमें अजाक्स (अनुसूचित जाति‑जनजाति अधिकारी कर्मचारी संघ) के नवनियुक्त प्रांताध्यक्ष श्री संतोष वर्मा (आईएएस) के विरुद्ध जारी कारण बताओ नोटिस को तत्काल रद्द करने की मांग की गई है।
23 नवंबर 2025 को भोपाल में आयोजित अजाक्स के प्रांतीय अधिवेशन में श्री संतोष वर्मा, जो अनुसूचित जनजाति वर्ग से हैं, ने सामाजिक समरसता, जातिवाद उन्मूलन और संविधान के मूल्यों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लगभग 27 मिनट का उद्बोधन दिया था।
उन्होंने अपने भाषण में “रोटी‑बेटी के संबंधों” के माध्यम से सामाजिक एकता, हिंदू एकाकारता और जाति‑पांति से ऊपर उठकर मानवता को सर्वोपरि मानने की बात कही।
ज्ञापन में उठाए गए मुद्दे
ज्ञापन में कहा गया है कि कुछ समूहों ने इस उद्बोधन को जानबूझकर 7 सेकंड की वीडियो क्लिप में तोड़‑मरोड़ कर प्रस्तुत किया, जिससे सामाजिक वैमनस्य फैलाने का प्रयास किया गया।
यह कार्य न केवल संविधान की मूल भावना – समानता, बंधुत्व और सामाजिक न्याय – के विरुद्ध है, बल्कि एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की गरिमा को भी ठेस पहुँचाता है।
ज्ञापन में आगे उल्लेख किया गया है कि मध्य प्रदेश शासन ने बिना उचित विचार‑विमर्श, तथ्यों की निष्पक्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया अपनाए बिना श्री वर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी किया, जो अनुच्छेद 14, 15(4), 16(4), 21, 38(2) और 46 के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध है।
आर्थिक और सामाजिक अंतर पर प्रकाश*उद्बोधन में श्री वर्मा ने कहा कि आईएएस बनने के बाद आर्थिक संपन्नता तो प्राप्त हो जाती है, परंतु सामाजिक पिछड़ापन और भेदभाव अभी भी बना हुआ है। यह बात ज्ञापन में सामाजिक असमानता के जारी रहने का प्रमाण माना गया है।
*आलोचना के शिकार व्यक्तियों के नाम- ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि श्री मुकेश मौर्य, जो ग्वालियर के MITS में मशीन अटेंडेंस पद पर कार्यरत हैं,
तथा श्री सुधीर नायक, जो भल्लभ भवन, भोपाल से जुड़े हैं, अजाक्स की छवि धूमिल करने, जातीय तनाव फैलाने और निजी लाभ के लिए जातीय उकसावे का माहौल तैयार करने में शामिल हैं।
इनके विरुद्ध अजाक्स द्वारा ₹17,95,000 के गबन का मामला दर्ज करने के लिए एसपी ग्वालियर तथा पुलिस थाना टीटी नगर, भोपाल में आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया है।
*मुख्य मांगें*1. श्री संतोष वर्मा (आईएएस) को जारी कारण बताओ नोटिस को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।
2. सामाजिक वैमनस्य फैलाने वाले व्यक्तियों/समूहों के विरुद्ध अनुसूचित जाति‑जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
3. इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति गठित की जाए, जिससे आदिवासी एवं वंचित वर्ग के वरिष्ठ अधिकारियों को बिना कारण प्रताड़ित न किया जाए।
4. सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता के संवर्धन हेतु “अनुलोम‑विलोम विवाह योजना” को अधिक सशक्त रूप में लागू किया जाए।
ज्ञापन में अंत में कहा गया है कि यदि समय रहते न्यायपूर्ण समाधान नहीं हुआ तो प्रदेश के अनुसूचित जाति‑जनजाति वर्ग के लोग लोकतांत्रिक तरीके से सड़कों पर उतरने को बाध्य होंगे। ज्ञापन की प्रतिलिपि महामहिम राज्यपाल, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को भी भेजी गई है।
शासन की ओर से इस ज्ञापन पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। मामले की आगे की जांच और संभावित कार्रवाई की स्थिति पर अपडेट उपलब्ध होने पर सूचित किया जाएगा।
























