अंधेर नगरी / यह विषय बहुत महत्वपूर्ण और संवेदनशील है। डॉ. भीमराव अंबेडकर जी हमेशा इस बात पर जोर देते थे कि समाज में एक-दूसरे के प्रति गलत नज़र, भेदभाव, ऊँच-नीच, छुआछूत और जातिगत पूर्वाग्रह किसी भी सभ्य समाज के लिए सबसे बड़ा रोग है। इसे मिटाए बिना एक समान और न्यायपूर्ण भारत की कल्पना अधूरी है।नीचे अंबेडकर जी के विचारों पर आधारित एक सुंदर, संक्षिप्त और प्रभावशाली संदेश तैयार किया गया है जिसे आप समाज में जागरूकता के लिए भेज सकते हैं:—✒️ डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी के विचार — समाज को गलत नज़रों से देखने की प्रवृत्ति पर संदेश”मनुष्य जन्म से नहीं, अपने कर्म और विचारों से महान बनता है।” — डॉ. बी.आर. अंबेडकरडॉ. भीमराव अम्बेडकर जी का मानना था किसमाज में एक-दूसरे को गलत नज़र से देखना, जाति–पांति के आधार पर भेदभाव करना, या किसी को छोटा–बड़ा समझना—यह मानवता के खिलाफ सबसे बड़ा अपराध है।बाबासाहेब कहते थे:जो समाज आपस में बंटा रहता है, वह कभी प्रगति नहीं कर सकता।समानता, न्याय, बंधुता और आपसी सम्मान—यही एक स्वस्थ समाज की नींव है।अगर हमें महान भारत बनाना है तो सबसे पहले हमें अपने मन की गलत धारणाओं को मिटाना होगा।आज हमें यही संकल्प लेना चाहिए कि—हम एक-दूसरे को नज़रिए से नहीं, इंसानियत से देखेंगे।जाति नहीं, क्षमता और चरित्र को मान देंगे।और एक ऐसे समाज का निर्माण करेंगे जिसमें हर व्यक्ति सम्मान, समान अवसर और न्याय का हकदार हो।डॉ भीमराव अम्बेडकर मानव सेवा समिति सोसाइटी एनजीओ बीना जिला सागर मध्यप्रदेश

























