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कलेक्टर ने आंगनवाड़ी अनियमितताओं पर सख्त रुख अपनाया।

डीपीओ सहित तीन सीडीपीओ को नोटिस, एक दिन में मांगा जवाब। दतिया। जिले के आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों एवं गर्भवती माताओं को मिलने वाली मूलभूत सेवाओं में लापरवाही सामने आने के बाद कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े ने कड़ा रुख अपनाया है, आंगनवाड़ी केंद्रों की वास्तविक स्थिति की जांच के उद्देश्य से कलेक्टर द्वारा संयुक्त कलेक्टर को…

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डीपीओ सहित तीन सीडीपीओ को नोटिस, एक दिन में मांगा जवाब।

दतिया। जिले के आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों एवं गर्भवती माताओं को मिलने वाली मूलभूत सेवाओं में लापरवाही सामने आने के बाद कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े ने कड़ा रुख अपनाया है, आंगनवाड़ी केंद्रों की वास्तविक स्थिति की जांच के उद्देश्य से कलेक्टर द्वारा संयुक्त कलेक्टर को जिले के विभिन्न केंद्रों का औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए थे।

इन निर्देशों के पालन में शुक्रवार को संयुक्त कलेक्टर दतिया द्वारा जिले के अलग-अलग शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित आंगनवाड़ी केंद्रों का निरीक्षण किया गया।

निरीक्षण के दौरान कई केंद्रों पर पोषण आहार वितरण में अनियमितता, केंद्रों का समय पर संचालन न होना, बच्चों की अपेक्षित उपस्थिति न मिलना, तथा अभिलेखों के संधारण में गंभीर कमियां पाई गईं। कुछ केंद्रों पर रजिस्टर अधूरे पाए गए, तो कहीं बच्चों एवं लाभार्थियों की वास्तविक संख्या और दर्ज आंकड़ों में अंतर पाया गया।

निरीक्षण रिपोर्ट को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर वानखड़े ने इसे बच्चों और माताओं के अधिकारों से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील मामला बताया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आंगनवाड़ी सेवाएं शासन की प्राथमिक जनकल्याणकारी योजनाओं में शामिल हैं, जिनमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इसी क्रम में कलेक्टर द्वारा महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) अरविंद उपाध्याय, बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) दतिया ग्रामीण विजय पांडोलिया, सीडीपीओ दतिया शहरी प्रतिमा पाठक एवं सीडीपीओ भांडेर नीलम मौर्य को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

सभी अधिकारियों से एक दिवस के भीतर लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं, कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि प्रस्तुत जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी। साथ ही भविष्य में आंगनवाड़ी केंद्रों के संचालन, पोषण आहार वितरण एवं अभिलेख संधारण में पारदर्शिता और नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

प्रशासन की इस सख्ती के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग में हड़कंप की स्थिति है। जिला प्रशासन का कहना है कि आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य एवं प्रारंभिक शिक्षा से कोई भी समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा, और आगे भी ऐसे निरीक्षण लगातार जारी रहेंगे।

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