राजस्थान की बेटियों के हक के लिए प्रियंका गोस्वामी का बड़ा ‘संकल्प’

नियम 4.1 की याद दिलाकर सरकार से पूछा—कहाँ हैं जन्म पर मिलने वाले डेढ़ लाख के ‘संकल्प पत्र’? शाहपुरा-राजेन्द्र खटीक।​शाहपुरा/भीलवाड़ा। भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा की एक साधारण माँ प्रियंका गोस्वामी आज राजस्थान की लाखों ‘लाडो’ के लिए एक मिसाल बन गई हैं। प्रियंका ने सरकार के ही मार्गदर्शी सिद्धांतों (Guidelines) के बिंदु 4.1 का हवाला…

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नियम 4.1 की याद दिलाकर सरकार से पूछा—कहाँ हैं जन्म पर मिलने वाले डेढ़ लाख के ‘संकल्प पत्र’?

शाहपुरा-राजेन्द्र खटीक।​शाहपुरा/भीलवाड़ा।

भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा की एक साधारण माँ प्रियंका गोस्वामी आज राजस्थान की लाखों ‘लाडो’ के लिए एक मिसाल बन गई हैं। प्रियंका ने सरकार के ही मार्गदर्शी सिद्धांतों (Guidelines) के बिंदु 4.1 का हवाला देते हुए प्रशासन की नींद उड़ा दी है।

उन्होंने दस्तावेजी प्रमाणों के साथ यह साबित किया है कि नियमों में जन्म पर ही डेढ़ लाख रुपये का संकल्प पत्र देना अनिवार्य है, लेकिन धरातल पर अधिकारियों की लापरवाही के कारण माताओं के हाथ खाली हैं।

​1. नियम 4.1: कागजों में ‘संकल्प’, हकीकत में ‘लापरवाही’​प्रियंका गोस्वामी ने मुख्यमंत्री को भेजे अपने ताजा पत्र में खुलासा किया कि योजना के बिंदु 4.1 के अनुसार, बालिका के जन्म पर तुरंत ‘संकल्प पत्र’ दिया जाना चाहिए।

प्रियंका ने मांग की है कि इसे अस्पताल के ‘डिस्चार्ज टिकट’ के साथ नत्थी (Attach) किया जाए। उनका तर्क है कि जब एक गरीब पिता के हाथ में ₹1.50 लाख का यह ‘संकल्प पत्र’ होगा, तो वह ₹1 लाख की अंतिम किश्त के भरोसे अपनी बेटी को स्नातक (Graduation) तक जरूर पढ़ाएगा।​

2. ‘डाक और आंगनवाड़ी’ से घर-घर पहुँचे संकल्प पत्र​प्रियंका ने सरकार को एक बहुत ही व्यवहारिक सुझाव दिया है कि जिन बालिकाओं का जन्म योजना लागू होने के बाद हो चुका है

और जिन्हें अभी तक ‘संकल्प पत्र’ नहीं मिला है, उन्हें प्रशासन डाक (Post) या आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से घर बैठे यह पत्र उपलब्ध कराए। उनका कहना है कि डिजिटल पोर्टल के भरोसे गरीब परिवारों को नहीं छोड़ा जा सकता, उनके हाथ में सरकारी गारंटी का कागज़ होना जरूरी है।​

3. ‘राजश्री’ से ‘लाडो’ में शिफ्ट हुई बेटियों की चिंता​प्रियंका गोस्वामी ने उन बालिकाओं की आवाज़ भी उठाई है जो पहले ‘राजश्री योजना’ का लाभ ले रही थीं और अब ‘लाडो प्रोत्साहन योजना’ में शामिल (Convert) हो गई हैं। उन्होंने मांग की है

कि जिन बालिकाओं ने राजश्री की प्रथम दो किश्तें ले ली हैं और अब वे लाडो योजना की पात्र हैं, सरकार उन्हें भी संशोधित ₹1.50 लाख का नया संकल्प पत्र जारी करे, ताकि उनका भविष्य भी पूरी तरह सुरक्षित और स्पष्ट हो सके।​

एक माँ की जागरूकता से बदला पूरे राजस्थान का पोर्टल​गौरतलब है कि प्रियंका की पुत्री गुंजन के जन्म पर पोर्टल ने गलत तरीके से ₹1 लाख का पत्र दिखाया था।

प्रियंका के निरंतर संघर्ष और पत्राचार का ही परिणाम है कि सरकार को अपनी तकनीकी गलती माननी पड़ी और अब पूरे राजस्थान में पोर्टल को संशोधित कर ₹1.50 लाख कर दिया गया है।​

मुख्यमंत्री से आशीर्वाद की आस​प्रियंका ने अपनी इस विजनरी मांग की प्रतियां शासन सचिव, आयुक्त, जिला कलेक्टर, ADM और CMHO को भेजी हैं। प्रियंका अपनी भाई दूज की प्रार्थना जो मुख्यमंत्री जी से की है,

अब उन्हें उसका इंतज़ार है मुख्यमंत्री भजनलाल जी शर्मा के उस आमंत्रण का, जहाँ वे अपनी बेटी के साथ मिलकर स्वयं मुख्यमंत्री के हाथों से यह ‘संकल्प पत्र’ आशीर्वाद के रूप में प्राप्त कर सकें और इस व्यवस्था को पूरे प्रदेश में लागू करवा सकें।​”

प्रियंका गोस्वामी ने साबित किया है कि एक जागरूक माँ पूरे सिस्टम को जवाबदेह बना सकती है। उनका यह प्रयास राजस्थान में बाल विवाह को रोकने और उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा।

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