भेड़-बकरी व्यापारियों के लिए बड़ी राहत, व्यापारियों के लंबे संघर्ष की बड़ी जीत
राजस्थान सरकार ने गुजरात और महाराष्ट्र सरकार को लिखा पत्र
शाहपुरा (भीलवाड़ा)-राजेन्द्र खटीक। जयपुर/राजस्थान सरकार के पशुपालन विभाग ने भेड़-बकरी पालकों एवं व्यापारियों के हित में महत्वपूर्ण पहल करते हुए गुजरात एवं महाराष्ट्र सरकार को पत्र भेजा है। यह कार्रवाई ऑल इंडिया शीप एंड गोट्स ब्रीडर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन द्वारा लगातार उठाई गई शिकायतों और लंबे संघर्ष के बाद हुई है।
शिकायत में बताया गया था कि राजस्थान से गुजरात और महाराष्ट्र की विभिन्न मंडियों (सूरत, वापी, देवनार आदि) में वैध रूप से भेड़-बकरियों का परिवहन करने वाले व्यापारियों को कई स्थानों पर PCA Act के नाम पर रोका जाता है, कथित अवैध वसूली की जाती है तथा न्यायालय के आदेशों के बावजूद कुछ मामलों में जब्त पशु मालिकों को वापस नहीं दिए जाते, जिससे पशुपालकों और व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए राजस्थान के प्रमुख शासन सचिव विकास सीतारामजी भाले (IAS) ने महाराष्ट्र सरकार को पत्र लिखकर संबंधित जिला प्रशासन एवं पुलिस अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है, ताकि वैध व्यापार करने वाले पशुपालकों एवं व्यापारियों का अनावश्यक उत्पीड़न रोका जा सके।
साथ ही संयुक्त शासन सचिव दिनेश कुमार जांगिड़ ने राजस्थान के पशुपालन विभाग को निर्देश दिए हैं कि अंतर्राज्यीय पशु परिवहन के लिए Schedule-J फिटनेस प्रमाण पत्र नियमानुसार एवं समय पर जारी किए जाएँ, ताकि वैध व्यापार में किसी प्रकार की बाधा न आए।
इस संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले साथी:असलम (मुंबई), मुन्ना भाई दलाल (जयपुर), शान्ति लाल (बडलियास), प्रभु जी (बारां),राजू (बावलास), जगदीश (गेंदलिया), प्रेम (आमलदा), कैलास (भिचोर), कैलाश (पारसोली),पारस (बीगोद), गोटू (मंगरोप), उदय लाल (बनेड़ा), पुरण (कपासन), रमेश, शंकर, रंगलाल (तुर्किया), कमलेश (मेहन्द्रगढ़), राजू पहाड़िया (बडलियास),
मुख्य बिंदु
✅ राजस्थान सरकार ने गुजरात एवं महाराष्ट्र सरकार से हस्तक्षेप का अनुरोध किया।
✅ वैध पशु परिवहन में अनावश्यक रोक-टोक एवं कथित अवैध वसूली पर चिंता व्यक्त की।
✅ न्यायालय के आदेशों के पालन और पशुओं की सुपुर्दगी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
✅ Schedule-J फिटनेस प्रमाण पत्र समय पर जारी करने के निर्देश दिए गए।
✅ भेड़-बकरी पालकों एवं व्यापारियों ने इसे अपने लंबे संघर्ष की महत्वपूर्ण जीत बताया।