माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में अतिथि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया विवादों में घिरी हुई है। डॉक्टर अभिषेक यादव, जिन्हें पहली सूची में चुना गया था, का आरोप है कि विश्वविद्यालय ने एससी, एसटी और ओबीसी उम्मीदवारों के साथ भेदभाव किया और आरक्षण नियमों का पालन नहीं किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रदेश के लोगों को नजरअंदाज किया गया और चयनित लोगों को भी लेक्चर नहीं दिए गए।
वीडियो में सुने पुरी दास्तान
विवाद के मुख्य बिंदु:
भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताएं:
डॉक्टर यादव का आरोप है कि विश्वविद्यालय ने भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताएं बरतीं और आयोग के लोगों को प्राथमिकता दी।-
आरक्षण नियमों का उल्लंघन:
डॉक्टर यादव का दावा है कि विश्वविद्यालय ने आरक्षण नियमों का पालन नहीं किया और एससी, एसटी और ओबीसी उम्मीदवारों को नजरअंदाज किया।-
प्रदेश के लोगों के साथ भेदभाव:
डॉक्टर यादव का आरोप है कि विश्वविद्यालय ने प्रदेश के लोगों के साथ भेदभाव किया और उन्हें अवसर नहीं दिए।
आगे की कार्रवाई:
डॉक्टर यादव ने इस मुद्दे को लेकर कई जगह शिकायतें दर्ज कराईं हैं, लेकिन अभी तक विश्वविद्यालय की तरफ से कोई समाधान नहीं निकला है। अब देखना यह है कि विश्वविद्यालय इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और आरोपों की जांच कैसे की जाती है।यह ध्यान देने योग्य है कि माखनलाल विश्वविद्यालय ने हाल ही में कई सकारात्मक कदम उठाए हैं, जैसे कि शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार और विद्यार्थियों के फीडबैक सिस्टम को अपनाना। लेकिन इस विवाद ने विश्वविद्यालय की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं
























