स्वप्निल वानखड़े के निर्देश पर बहुस्तरीय टीम करेगी निगरानी, जनजागरण अभियान भी चलेगा।
दतिया। देवउठनी एकादशी के अवसर पर जहां पूरे जिले में धार्मिक और सामाजिक आयोजन धूमधाम से संपन्न होते है, वहीं इस अवसर पर सामूहिक एवं एकल विवाह समारोहों का भी विशेष महत्व होता है।
परंतु इन आयोजनों के दौरान बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े ने संवेदनशील और कड़े कदम उठाए है।
उन्होंने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 की धारा 13(4) एवं (5) के अंतर्गत आदेश जारी कर जिले में विभिन्न स्तरों पर बाल विवाह रोकथाम उड़न दस्तों का गठन किया है,
जिला स्तरीय दल का गठन, कलेक्टर द्वारा जारी आदेशानुसार, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत, जिला शिक्षा अधिकारी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, तथा जिला कार्यक्रम अधिकारी (महिला एवं बाल विकास) को जिला स्तरीय दल में शामिल किया गया है।
यह दल जिलेभर में बाल विवाह पर रोक लगाने, जागरूकता फैलाने और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी करेगा। विकासखंड स्तरीय निगरानी, विकासखंड दतिया, सेवढ़ा और भाण्डेर में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को ब्लॉक स्तरीय नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
इनके साथ संबंधित एसडीओपी, सीईओ जनपद पंचायत, तहसीलदार, परियोजना अधिकारी तथा थाना प्रभारी को भी टीम में शामिल किया गया है।
ये अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में विवाह आयोजनों पर विशेष नजर रखेंगे और बाल विवाह के किसी भी प्रयास पर तुरंत कार्रवाई करेंगे, ग्राम स्तर तक पहुंची व्यवस्था, ग्राम स्तर पर भी शासन की यह मुहिम मजबूत की गई है।
हाई स्कूल एवं माध्यमिक विद्यालयों के प्राचार्य, सरपंच एवं पंचगण, पंचायत सचिव, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता, स्व-सहायता समूह की सदस्याएं तथा शौर्यादल सदस्य को भी उड़न दस्तों में सम्मिलित किया गया है।
इन सभी को अपने क्षेत्र में होने वाले सामूहिक या व्यक्तिगत विवाह आयोजनों की जानकारी रखकर, किसी भी संदेहास्पद विवाह की सूचना तत्काल प्रशासन को देने के निर्देश दिए गए है। निगरानी और कानूनी कार्रवाई, ये सभी उड़न दस्ते अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय रहेंगे और सामूहिक विवाह स्थलों का निरीक्षण करेंगे।
जहां कहीं भी नाबालिग दूल्हा या दुल्हन की आशंका होगी, वहां बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत तत्काल कार्रवाई की जाएगी।साथ ही, की गई कार्रवाई का विस्तृत प्रतिवेदन जिला कार्यक्रम अधिकारी (महिला एवं बाल विकास विभाग) को भेजना अनिवार्य रहेगा।
जनजागरूकता पर भी होगा फोकस, प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ आम नागरिकों में जागरूकता बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। विद्यालयों, पंचायतों एवं आंगनवाड़ी केन्द्रों में जनजागरूकता अभियान, पोस्टर वितरण, तथा ग्राम सभाओं के माध्यम से बाल विवाह के दुष्परिणामों की जानकारी दी जाएगी।
कलेक्टर का संदेश, कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े ने जिलेवासियों से अपील की है कि वे समाज में इस कुरीति को समाप्त करने में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि
– बाल विवाह न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह बच्चों के भविष्य के साथ अन्याय भी है। प्रशासन हर स्तर पर सजग है, परंतु समाज के सहयोग से ही इसे पूर्णतः समाप्त किया जा सकता है।
इस प्रकार, देवउठनी एकादशी के अवसर पर प्रशासन ने बाल विवाह रोकथाम के लिए सख्त एवं संवेदनशील कदम उठाते हुए एक व्यापक अभियान की शुरुआत की है, जिससे यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बने बल्कि सामाजिक जागरूकता और बाल अधिकारों की रक्षा का भी संदेश दे सके।

























