भागीरथपुरा में ‘जहरीले’ पानी ने ली जानें, अब अफसरों पर गिरी गाज!
खुद को देश का सबसे ‘स्वच्छ शहर’ का तमगा पहना रखा है, और जनता को ऐसा ‘शाही अमृत’ पिलाया कि लोग टपाटप टपक गए।
भागीरथपुरा में गटर का पानी पीकर कई जिंदगियां लील गईं, और नगर निगम के ‘महान’ अधिकारियों को ‘बदबूदार’ पानी की शिकायतें चार साल से आ रही थीं, लेकिन ये कुंभकर्णी नींद में सो रहे थे!
अब जब हाहाकार मचा और कई लाशें उठ गईं, तब जाकर प्रशासन के कान के ‘मोटे पर्दे’ हटे हैं। नतीजा? निगम आयुक्त दिलीप यादव को हटाया गया! अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया और कार्यपालन यंत्री संजीव श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया गया है!
अरे भाई, ये तो वही बात हो गई – जब चिड़िया चुग गई खेत, तब डंडा लेकर भागे! इतने बड़े कांड के बाद भी सिर्फ हटाने और निलंबित करने से क्या होगा? ये ‘बाबू’ लोग तो घर बैठकर सरकारी पनीर खाएंगे।
इनकी मोटी चमड़ी पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा!जनता पूछ रही है: ‘स्वच्छता के चैंपियनों’, क्या यही तुम्हारी ‘कचरा-मुक्त’ व्यवस्था है? जिनकी लापरवाही ने मासूमों तक की जान ले ली, उन्हें सिर्फ ‘ट्रांसफर-पोस्टिंग’ की मिठाई क्यों? ऐसी ‘सफाई’ से तो गंदगी ही भली थी! अब जाकर शर्म करो, और सबक लो कि जनता की जान से खिलवाड़ कितना भारी पड़ सकता है।

























