चौकीदार के माध्यम से जीवंत हुआ गुरुजी का व्यक्तित्व — सभागार हुआ भावविभोर

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शाहपुरा (भीलवाड़ा)-राजेन्द्र खटीक।

शाहपुरा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, शाहपुर नगर की ओर से संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित नाट्य समारोह में राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार एडवोकेट दीपक पारीक ने रंगकर्मी रामप्रसाद पारीक द्वारा निर्देशित एकल अभिनय ‘चौकीदार’ के माध्यम से परम पूज्य गुरुजी माधवराव सदाशिव गोलवलकर के जीवन, विचारों और कार्यशैली को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से मंच पर प्रस्तुत किया।

‘चौकीदार’ के पात्र के सहारे प्रस्तुत किए गए इस नाटक में गुरुजी के व्यक्तित्व, उनके चिंतन और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण को जिस संवेदनशीलता और जीवंत अभिनय के साथ सामने रखा गया, उसने दर्शकों को गहराई तक प्रभावित किया। प्रस्तुति के दौरान पूरा सभागार मानो वर्तमान से निकलकर पिछली शताब्दी के उस दौर में पहुंच गया,

जब गुरुजी अपने विचारों और संगठनात्मक कार्यशैली के माध्यम से समाज जीवन में एक नई चेतना का निर्माण कर रहे थे। गुरुजी का संघ के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रहा है। उनका जीवन यह संदेश देता है कि किसी व्यक्ति की महानता सत्ता, वैभव या राजमहलों से नहीं, बल्कि उसके विचारों, त्याग, अनुशासन और समाज के प्रति समर्पण से होती है। बिना किसी सत्ता के केंद्र में रहे एक सशक्त संगठन को खड़ा करने की उनकी कार्यशैली आज भी अनुकरणीय मानी जाती है।

नाटक में विशेष रूप से गुरुजी के उस विचार को केंद्र में रखा गया कि संघ केवल एक संगठन नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण की प्रयोगशाला है, जहां व्यक्ति के भीतर अनुशासन, राष्ट्रभाव, सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे गुणों का विकास किया जाता है। इसी विचार को ‘चौकीदार’ के चरित्र और संवादों के माध्यम से मंच पर अत्यंत प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत किया गया।

एडवोकेट दीपक पारीक ने अपने दमदार संवाद, भावपूर्ण अभिनय, शारीरिक हाव-भाव और मंच पर प्रभावी उपस्थिति से दर्शकों को बांधे रखा। उनके अभिनय की विशेषता रही कि उन्होंने एक ही पात्र के माध्यम से अनेक भावों और परिस्थितियों को इस तरह प्रस्तुत किया कि दर्शक पूरे समय कथा से जुड़े रहे।

प्रस्तुति के दौरान सभागार में छाया मौन और दर्शकों की एकाग्रता कलाकार की प्रस्तुति की प्रभावशीलता को स्वयं प्रमाणित कर रही थी। नाटक के समापन पर दर्शकों ने जोरदार तालियों के साथ कलाकार का उत्साहवर्धन किया।कार्यक्रम के अंत में नगर के कन्हैया लाल ने उपस्थित अतिथियों, कलाकारों, आयोजकों एवं दर्शकों का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया।

‘चौकीदार’ केवल एक नाट्य प्रस्तुति नहीं, बल्कि विचार, व्यक्तित्व निर्माण, राष्ट्रभाव और गुरुजी के जीवन-दर्शन को मंच के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक सार्थक प्रयास बनकर सामने आया।

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