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लापरवाही पर होगी सख्त कार्यवाही कलेक्टर स्वप्निल वानखडे समय-सीमा बैठक में लंबित प्रकरणों की गहन समीक्षा, शिक्षा विभाग को लगाई फटकार।

दतिया। कलेक्टर स्वप्निल वानखडे की अध्यक्षता में सोमवार को जिला कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में समय-सीमा बैठक का आयोजन किया गया। इस साप्ताहिक बैठक में जिले के सभी विभागों के प्रमुख अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में विभिन्न विभागों के लंबित प्रकरणों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर वानखडे ने अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि शासन…

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दतिया। कलेक्टर स्वप्निल वानखडे की अध्यक्षता में सोमवार को जिला कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में समय-सीमा बैठक का आयोजन किया गया।

इस साप्ताहिक बैठक में जिले के सभी विभागों के प्रमुख अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में विभिन्न विभागों के लंबित प्रकरणों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर वानखडे ने अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि शासन के निर्देशों का पालन समय-सीमा में सुनिश्चित करें, अन्यथा लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

300 दिनों से अधिक लंबित प्रकरणों पर नाराजगी, बैठक के दौरान सीएम हेल्पलाइन सहित अन्य योजनाओं से जुड़े 300 से अधिक दिनों से लंबित प्रकरणों पर कलेक्टर ने गहरी नाराजगी जताई।

उन्होंने कहा कि यह स्थिति बिल्कुल अस्वीकार्य है। सभी विभाग आगामी शुक्रवार तक इन प्रकरणों का निराकरण सुनिश्चित करें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे मामलों की प्राथमिकता के आधार पर समीक्षा कर तत्परता से निपटारा किया जाए।

कलेक्टर ने कहा, जनता की शिकायतें शासन की प्राथमिकता है। जो अधिकारी या कर्मचारी इन प्रकरणों में लापरवाही बरतेंगे, उनके विरुद्ध व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी।शिक्षा विभाग पर फटकार, पेंशन प्रकरणों में देरी पर असंतोष, कलेक्टर वानखडे ने विशेष रूप से शिक्षा विभाग के लंबित पेंशन प्रकरणों पर नाराजगी व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को समय पर पेंशन और लाभ मिलना उनका अधिकार है। विभागीय लापरवाही से बुजुर्ग कर्मचारियों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जो किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने निर्देश दिए कि किसी भी कर्मचारी की सेवानिवृत्ति के तीन माह पूर्व उसकी संपूर्ण सेवा जानकारी कोषालय कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए,

ताकि पेंशन कार्यवाही समय-सीमा के भीतर पूरी की जा सके, विद्यालय निरीक्षण में पाई गई अनियमितताओं पर सख्ती, हाल ही में कलेक्टर द्वारा इंदरगढ़ क्षेत्र के स्कूलों के निरीक्षण के दौरान विद्यार्थियों की अनुपस्थिति एवं शिक्षकों की लापरवाही पर असंतोष व्यक्त किया गया था।

बैठक में इस विषय पर चर्चा करते हुए उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए कि जो शिक्षक चुनाव कार्य में संलग्न नहीं है, उनकी अनिवार्य उपस्थिति विद्यालयों में सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि शिक्षण व्यवस्था में अनुशासन और नियमितता बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

विभिन्न योजनाओं और विभागीय प्रकरणों की समीक्षा, बैठक में पीएम किसान सम्मान निधि योजना के ई-केवाईसी अद्यतन कार्य, अनुकंपा नियुक्ति प्रकरण, अवमानना प्रकरणों तथा विभागवार लंबित पत्रकों की भी विस्तृत समीक्षा की गई।

कलेक्टर ने कहा कि शासन की योजनाओं से संबंधित सभी कार्य निर्धारित समय में पूर्ण होना आवश्यक है, क्योंकि इन योजनाओं से सीधे जनता का हित जुड़ा हुआ है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट प्रतिदिन अपडेट करें तथा विभागीय समन्वय को मजबूत बनाएं।

जनजातीय छात्रावासों व विद्यालयों की मरम्मत कार्य पर जोर, कलेक्टर वानखडे ने जनजातीय कार्य विभाग को निर्देश दिए कि जिन छात्रावासों में मरम्मत या रखरखाव कार्य आवश्यक है, उनके प्रस्ताव शीघ्र जिला प्रशासन को भेजे जाएं। साथ ही शिक्षा विभाग को चेतावनी दी कि विद्यालय भवनों की मरम्मत एवं रखरखाव प्रस्तावों में ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थी हितों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों को जवाब देना होगा। नरवाई जलाने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई, बैठक के अंत में कलेक्टर वानखडे ने नरवाई जलाने की घटनाओं पर सख्त रुख अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नरवाई जलाने वालों पर जुर्माना और एफआईआर दोनों दर्ज की जाएंगी।

इस प्रकार की गतिविधियाँ न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुँचाती हैं, बल्कि फसलों को भी हानि पहुंचाती है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “किसी भी परिस्थिति में पर्यावरण और किसानों के हितों से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। समय-सीमा, जवाबदेही और पारदर्शिता पर जोर, कलेक्टर स्वप्निल वानखडे ने कहा कि शासन की प्राथमिकता समय-सीमा में कार्य, जवाबदेही और पारदर्शिता” है।

उन्होंने सभी अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि भविष्य में किसी भी कार्य में देरी या शासन आदेशों के पालन में ढिलाई पाई गई, तो व्यक्तिगत उत्तरदायित्व तय किया जाएगा, उन्होंने कहा कि “जनता का विश्वास प्रशासन की सबसे बड़ी पूंजी है। हमारी कार्यशैली ऐसी होनी चाहिए जिससे आम नागरिकों को यह महसूस हो कि प्रशासन उनकी समस्याओं के समाधान के लिए संवेदनशील और सक्रिय है।

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