राजगढ़ चौराहा गैंगवार, 22 साल पुराने हत्याकांड में।दतिया।
दतिया में राजगढ़ चौराहे पर 24 अप्रैल 2003 को हुए चर्चित गैंगवार मामले में न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। माननीय विशेष न्यायाधीश राजेश भंडारी जी ने शासन बनाम महेश यादव आदि प्रकरण में आरोपी मुकेश यादव (निवासी कोहुआ) को भारतीय दंड संहिता की धारा 148, 302, 149, 307 एवं 120-बी के तहत दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
साथ ही न्यायालय ने आरोपी पर 36 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। प्रकरण में शासन की ओर से पैरवी कर रहे अतिरिक्त लोक अभियोजक अरुण कुमार लिटौरिया ने बताया कि घटना दिनांक 24 अप्रैल 2003 की है।
फरियादी राघवेंद्र प्रताप सिंह बुंदेला ने कोतवाली दतिया में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह अपने भाई भैया राजा उर्फ सत्येंद्र सहित अन्य साथियों—राधावल्लभ दांगी, रामस्वरूप उर्फ शोले सेन, संग्राम सिंह, नीरज तिवारी, रंजीत सेन, बसंत कुमार सेन, संतोष श्रीवास्तव, धर्मेंद्र यादव, मौजी तिवारी, सनमान सिंह बुंदेला, कपिल शर्मा, रम्मू दांगी एवं रमेश—के साथ कचहरी दतिया से घर लौट रहे थे।
इसी दौरान राजगढ़ चौराहे से आगे रेंज कार्यालय के पास आरोपीगण महेश यादव, बल्दाऊ यादव, बनवाली काछी, केहरी सिंह यादव, मुकेश यादव, मुन्ना यादव तथा पांच अज्ञात बदमाश हथियारों से लैस होकर सड़क के दोनों ओर से आए और प्रार्थी व उसके साथियों पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी।
इस हमले में सत्येंद्र उर्फ भैयाराजा, मौजी तिवारी, राधावल्लभ एवं धर्मेंद्र की मौके पर ही मृत्यु हो गई, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर घायलों का उपचार कराया, मृतकों का पोस्टमार्टम कराया और विवेचना उपरांत आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया। विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष ने 38 साक्षियों के बयान कराए। अंतिम बहस के बाद निर्णय से पूर्व आरोपी मुकेश यादव एवं बल्दाऊ यादव फरार हो गए थे, जबकि उपस्थित अन्य आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय द्वारा 26 दिसंबर 2024 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी थी।
बाद में आरोपी मुकेश यादव न्यायालय में उपस्थित हुआ, जिसके बाद उसके प्रकरण पर पृथक से विचार कर माननीय न्यायालय ने आज 18 दिसंबर 2025 को उसे उपरोक्त धाराओं में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया।
इस फैसले के साथ ही 22 वर्ष पुराने राजगढ़ चौराहा गैंगवार प्रकरण में एक और आरोपी को सजा मिलने से पीड़ित पक्ष को न्याय मिला है और कानून का संदेश स्पष्ट हुआ है।








