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जिंदगी का नाम ही कभी खुशी कभी गम,दुःख के बिना नहीं सुख का अहसास-पद्मकीर्तिजी म.सा.

दिवाकर कमला दरबार में साप्ताहिक अनुष्ठान आराधना आज सुबह 8.30 बजे से शाहपुरा-राजेन्द्र खटीक।भीलवाड़ा-हमारी जिंदगी का नाम ही कभी खुशी कभी गम है। जीवन में सुख दुःख का आना जाना चलता रहता है। क्रोध हमेशा नाश का कारण होता है। मुस्कान रूपी चाबी से क्रोध का ताला खोला जा सकता है। गुस्से का जवाब क्षमा…

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दिवाकर कमला दरबार में साप्ताहिक अनुष्ठान आराधना आज सुबह 8.30 बजे से

शाहपुरा-राजेन्द्र खटीक।भीलवाड़ा-हमारी जिंदगी का नाम ही कभी खुशी कभी गम है। जीवन में सुख दुःख का आना जाना चलता रहता है। क्रोध हमेशा नाश का कारण होता है।

मुस्कान रूपी चाबी से क्रोध का ताला खोला जा सकता है। गुस्से का जवाब क्षमा से देने पर माहौल शांत हो जाएगा। गुस्से पर पेट्रोल नहीं पानी का छिड़काव करना चाहिए। गुस्सा आए तो विवेक खोने की बजाय चिंतन करे कि हमारे लिए क्या सही ओर क्या गलत है।

ये विचार अनुष्ठान आराधिका ज्योतिष चन्द्रिका महासाध्वी डॉ. कुमुदलता जी म.सा. की सुशिष्या वास्तुशिल्पी डॉ. पद्मकीर्तिजी म.सा. ने आध्यात्मिक चातुर्मास आयोजन समिति द्वारा सुभाषनगर श्रीसंघ के तत्वावधान में दिवाकर कमला दरबार में बुधवार को धर्मसभा में व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि जीवन में दुःख आए बिना सुख का अहसास नहीं हो सकता है। क्रोध में क्षमा करना सीख जाए तो कृष्ण बन जाएंगे। हम दूसरों की गलती पर गुस्सा करते है पर अपनी गलती की अनदेखी करते है।

गुस्सा आए तो भगवान अरिष्टनेमी का जाप करे वह शांत हो जाएगा। साध्वी पद्मकीर्तिजी म.सा. ने बताया कि गुरूवार को सुबह 8.30 बजे से अनुष्ठान आराधना के तहत भगवान महावीर स्वामी की अंतिम देशना उत्तराध्ययन सूत्र के 18वें अध्ययन की 38वीं गाथा का जाप किया जाएगा। इसके माध्यम से अज्ञान की अवस्था में किए गए पापों का प्रायश्चित करते है।

इसमें चक्रवती राजाओं का विवेचन है उनकी जैसी रिद्धि सिद्धि एवं सम्पन्नता प्राप्त हो इसके लिए ये अनुष्ठान करना चाहिए। हमे परमात्मा से याचना नहीं बल्कि प्रार्थना करनी चाहिए। प्रार्थना करने वाला पुजारी ओर याचना करने वाला भिखारी होता है। धर्मसभा में विद्याभिलाषी साध्वी राजकीर्ति जी म.सा. ने कहा कि ये सांसारिक जीवन क्षणभंगुर है ओर यहां जो रिश्ते नाते बने है वह भी क्षणभंगुर है। जिस क्षण ये जीवन समाप्त होगा ये सांसारिक रिश्ते भी छूट जाएंगे। ऐसे में इन रिश्तों का मोह नहीं रख अपनी आत्मा को पहचानने का प्रयास करे।

हमारा लक्ष्य शरीर का कल्याण नहीं बल्कि धर्म साधना करके अपनी आत्मा का कल्याण करना होना चाहिए। जो प्राणी आत्मकल्याण के लक्ष्य पर आगे बढ़ जाते है उनका जीवन सार्थक बन जाता है।धर्मसभा में उदयपुर के कांतिलाल जैन सहित विभिन्न अतिथियों का स्वागत आध्यात्मिक चातुर्मास आयोजन समिति एवं सुभाषनगर श्रीसंघ द्वारा किया गया। नवरात्र में प्रतिदिन लक्की ड्रॉ भी निकाले जा रहे है। संचालन चातुर्मास समिति के सचिव राजेन्द्र सुराना ने किया।

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