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दलित-आदिवासी-घुमंतू समाज पर अन्याय के खिलाफ संघर्ष तेज, दुःख की घड़ी में नहीं आते राजनीतिक दल

समाज के अधिकारों की लड़ाई में केवल अपने दलित संगठन संघर्षरत शादी,गोल बिटी, मुण्डन संस्कार, गृह-प्रवेश मायरा कार्यक्रमों में साफा बांधने आ जाते हैं दलित आदिवासी घुमंतू समाज सिर्फ चुनावी हिन्दू है शाहपुरा (भीलवाड़ा)-राजेन्द्र खटीक। रायपुर (भीलवाड़ा)-आज भी देश और प्रदेश के अनेक हिस्सों में दलित, आदिवासी एवं घुमंतू समाज को सामाजिक भेदभाव, छुआ-छूत, अपमान…

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समाज के अधिकारों की लड़ाई में केवल अपने दलित संगठन संघर्षरत

शादी,गोल बिटी, मुण्डन संस्कार, गृह-प्रवेश मायरा कार्यक्रमों में साफा बांधने आ जाते हैं

दलित आदिवासी घुमंतू समाज सिर्फ चुनावी हिन्दू है

शाहपुरा (भीलवाड़ा)-राजेन्द्र खटीक।

रायपुर (भीलवाड़ा)-आज भी देश और प्रदेश के अनेक हिस्सों में दलित, आदिवासी एवं घुमंतू समाज को सामाजिक भेदभाव, छुआ-छूत, अपमान और अत्याचार का सामना करना पड़ रहा है।

समाज के लोगों को घोड़ी पर बैठकर बंदोली निकालने से रोका जाता है, मंदिरों में प्रवेश नहीं करने दिया जाता, मनरेगा स्थलों पर अलग मटकी से पानी पीने को मजबूर किया जाता है तथा विद्यालयों में मिड-डे मील के दौरान भी भेदभाव और छुआ-छूत जैसी अमानवीय घटनाएं सामने आती रहती हैं।

समाजजनों का कहना है कि जब भी दलित, आदिवासी और घुमंतू समाज पर अन्याय-अत्याचार होता है, तब बड़े-बड़े राजनीतिक दल, स्वयंभू हिंदू संगठन और जनप्रतिनिधि मौन धारण कर लेते हैं। लेकिन चुनाव आते ही यही लोग समाज को धर्म और भावनाओं के नाम पर जोड़कर केवल वोट बैंक की राजनीति करने लग जाते हैं।

समाज के लोगों ने कहा कि दुःख और संघर्ष की घड़ी में कोई राजनीतिक दल पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा नजर नहीं आता, जबकि सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई लगातार केवल डा भीमराव अम्बेडकर युवा संगठन संस्था रायपुर जैसे सामाजिक संगठन लड़ रहे हैं।

संगठन द्वारा लगातार आंदोलन, धरना-प्रदर्शन, ज्ञापन और कानूनी संघर्ष के माध्यम से दलित, आदिवासी एवं घुमंतू समाज की आवाज़ बुलंद की जा रही है।दिनांक 26 मई 2026 को गंगापुर क्षेत्र में किशन लाल खटीक की संदिग्ध हत्या के विरोध में संगठन द्वारा धरना-प्रदर्शन कर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया तथा निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की गई।

समाज के लोगों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि इस गंभीर मामले में किसी भी राजनीतिक दल का कोई जनप्रतिनिधि पीड़ित परिवार के समर्थन में नहीं पहुंचा। इससे साफ जाहिर होता है कि इन दलों को केवल चुनाव के समय समाज के वोटों की चिंता रहती है, समाज के सम्मान और न्याय की नहीं।समाजजनों ने आह्वान किया कि अब दलित, आदिवासी और घुमंतू समाज को शिक्षा, संगठन और संघर्ष की ताकत को समझते हुए बाबा साहेब भीमराव रावजी आंबेडकर के विचारों पर चलना होगा तथा अपने सामाजिक संगठनों को मजबूत बनाना होगा।

“दलित आदिवासी घुमंतू समाज के संगठनों को तन, मन और धन से मजबूत बनाने में सहयोग करें, क्योंकि संगठित समाज ही अपने अधिकारों, सम्मान और न्याय की लड़ाई मजबूती से लड़ सकता है।

”सभा में ज्ञानचंद खटीक अध्यक्ष डा भीमराव अम्बेडकर युवा संगठन संस्था रायपुर आम चौरासी मेवाड़ मदारीया खटीक समाज, जगदीश उमरी के चौखला अध्यक्ष रोशनलाल बोलीवाल, रायमल भील करेडा, राजु भील कोशिथल, पवन सालवी पालरा, भवानी राम बेरवा पूर्व प्रधान पंचायत समिति रायपुर, राजकुमार रेगर रायपुर, निलेश रेगर बोराणा, मुकेश सालवी रायपुर, भंवर नट केमुणिया, रोशन बागरीया, विक्रम सपेरा कोट, आदी लोग मौजूद रहे समाजजनों ने कहा कि जब तक समाज संगठित नहीं होगा।

तब तक अन्याय और अत्याचार के खिलाफ लड़ाई कमजोर रहेगी। इसलिए हर व्यक्ति को सामाजिक एकता, संवैधानिक अधिकारों और न्याय की लड़ाई में आगे आकर सहयोग करना चाहिए।

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