राजेन्द्र खटीक। मथुरा-समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा मंदिरों में आने वाले चढ़ावे को लेकर दिए गए बयान पर संत समाज में नाराजगी देखने को मिल रही है। संतों का कहना है कि धार्मिक आस्थाओं और मंदिर व्यवस्थाओं को राजनीतिक बहस का विषय बनाने से बचना चाहिए।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि प्रकरण के मुख्य याचिकाकर्ता फलाहारी महाराज ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा अपनी आस्था के अनुसार चढ़ावा अर्पित किया जाता है और इस विषय पर अनावश्यक टिप्पणी उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यवस्था को लेकर कोई आपत्ति है तो उसके लिए संबंधित संस्थागत और कानूनी प्रक्रियाएं पहले से मौजूद हैं।
फलाहारी महाराज ने कहा कि जब सैफई महोत्सव आयोजित किए जाते थे तब उन पर बड़े पैमाने पर खर्च होता था, लेकिन उस समय ऐसे सवाल नहीं उठाए गए। उनका कहना था कि अब मंदिरों में आने वाले चढ़ावे को लेकर बयानबाजी की जा रही है, जिससे श्रद्धालुओं की भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान विभिन्न समुदायों के लिए कई योजनाएं और निर्माण कार्य किए गए, जिनमें हज यात्रियों की सुविधाओं के लिए हज हाउस का निर्माण भी शामिल है। उनके अनुसार, सार्वजनिक जीवन से जुड़े सभी विषयों पर समान दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए और किसी एक धर्म या परंपरा को निशाना बनाने से बचना चाहिए।
संत समाज के अन्य प्रतिनिधियों ने भी इस मुद्दे पर असहमति जताते हुए कहा कि मंदिरों की व्यवस्थाओं और धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि राजनीतिक दलों और नेताओं को ऐसे बयानों से बचना चाहिए, जिनसे समाज में अनावश्यक विवाद की स्थिति उत्पन्न हो।
संतों ने कहा कि देश की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ी हुई है। इसलिए सार्वजनिक मंचों पर दिए जाने वाले बयानों में संतुलन और संवेदनशीलता बनाए रखना आवश्यक है।















