छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक को पूरे देश में ” हिंदू साम्राज्य दिवस ” के रूप में मनाया जाता है इसी क्रम में हिंदू साम्राज्य दिवस आयोजन समिति दतिया द्वारा यह उत्सव सरस्वती विद्या मंदिर भरतगढ़ दतिया में मनाया गया
कार्यक्रम की अध्यक्षता अरुणादित्य सिंह जू देव “दतिया महाराज”ने की मुख्य वक्ता के रूप में सुरेश श्रीवास्तव रहे सर्वप्रथम अतिथियों द्वारा शिवाजी महाराज के चित्र पर माल्यार्पण कर एवं दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया
अतिथियों का स्वागत संतोष दुबे एवं ऋषि पांडे द्वारा किया गया एवं कार्यक्रम का कुशल संचालन संस्था के प्राचार्य कपिल तांबे द्वारा किया गया अध्यक्षीय आशीर्वचन के रूप में अरुणादित्य सिंह जू देव ने बताया कि आक्रांताओं से सनातन हिंदू संस्कृति को संरक्षित करने के लिए हिन्दवी स्वराज्य की स्थापना हुई थी हिन्दवी स्वराज का अर्थ है भारतीय लोगों का अपना शासन इस ऐतिहासिक अवधारणा की नींव 17वीं सदी में छत्रपति शिवाजी महाराज ने विदेशी आक्रांताओं के दमन से भारतवर्ष को मुक्त कराने और हिंदू संस्कृति की रक्षा के लिए की थी ।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं का रुझान पाश्चात्य संस्कृति की ओर बढ़ रहा है। हमें युवाओं को सनातन संस्कृति से जोड़ने पर जोर देना चाहिए। मुख्य वक्ता के रूप में सुरेश श्रीवास्तव ने अपने उद्बबोधन में छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए बताया कि महाराज शिवाजी हम सबके आदर्श हैं वह बचपन से ही तीक्ष्ण बुद्धि युद्ध कला में पारंगत और अपने राष्ट्र को मुगलों से स्वतंत्र कराने का प्रयास करते रहे उनके पिता भले ही मुगल शासको के यहां नौकरी करते थे परंतु महाराज शिवाजी ने कभी मुगलों की दासता स्वीकार नहीं की वह अपने पिता के साथ मुगल दरबार में जाते थे किंतु कभी झुके नहीं महाराज शिवाजी गोरिल्ला प्रणाली से युद्ध करते थे।
उनके प्रसंगों का वर्णन करते हुए बताया कि वह मुगलों की कैद से फलों की टोकरी में छिपकर बाहर आए और जब अफजल खां ने उन्हें धोखा देने के लिए गले लगाया तो शिवाजी ने बघनखा से उसकी आंतें निकाल दी जिससे अफजल खां के प्राण पखेरू उड़ गए जबकि इतिहास में इस घटना को छिपाकर यह बताया गया की शिवाजी ने अफजल खां को पेट में गुदगुदाया तो उस गुदगुदाने से अफजल खां को हार्ट अटैक आया और वह मर गया ।
शिवाजी महाराज अपनी हर कार्य प्रणाली में विजय निकलते थे। उनके उच्च चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि शिवाजी महाराज के युद्ध जीतने के बाद जब उनके सेनापति एक सुंदर मुगल महिला को लेकर शिवाजी के सामने लाये तो शिवाजी ने उस महिला का सम्मान करते हुए कहा कि आप इतनी सुंदर हैं काश मेरी मां भी इतनी सुंदर होती तो मैं भी इतना ही सुंदर होता यानी उस महिला में उन्होंने अपनी मां का रूप देखा । उन्होंने बताया कि छत्रपति शिवाजी महाराज का बचपन से एक ही उद्देश्य था वह था हिंदवी स्वराज्य की स्थापना करना और वह उद्देश्य ज्येष्ठ मास शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी ( 6 जून 1674) को रायगढ़ में पूर्ण हुआ।
उद्बोधन के पश्चात एक भव्य शोभा यात्रा निकाली गई जिसमें शिवाजी महाराज के स्वरूप बग्घी पर सवार थे शोभा यात्रा में सैकड़ो की संख्या में नगर वासी महिलाएं और पुरुष हाथों में भगवा ध्वज लेकर चल रहे थे। शोभा यात्रा नगर के विभिन्न मार्गो से होती हुई वापस भरतगढ़ विद्यालय पहुंची वहां भारत माता की आरती के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ ।















