राजस्थान। डाईट शाहपुरा का तीन दिवसीय डीआरजी शोध प्रशिक्षण सम्पन्न

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शोध में परिणामात्मकता, नवाचार और शैक्षिक गुणवत्ता पर दिया गया विशेष जोर, जिले के 12 ब्लॉकों से 32 शोधार्थियों ने लिया प्रशिक्षण

शाहपुरा (भीलवाड़ा)-राजेन्द्र खटीक।

शाहपुरा। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), उदयपुर के वार्षिक पंचांग की अनुपालना में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाईट), शाहपुरा में जिला संदर्भ समूह (डीआरजी) के अंतर्गत “अनुसंधान संबंधी जागरूकता एवं दक्षता संवर्धन” विषय पर आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ।

समापन समारोह में डाईट शाहपुरा के नव पदस्थापित प्रधानाचार्य अशोक कुमार पारीक ने शोधार्थी शिक्षकों का आह्वान करते हुए कहा कि शैक्षिक अनुसंधान में नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) एवं आधुनिक शैक्षिक तकनीकों का अधिकाधिक उपयोग कर शिक्षा की गुणवत्ता और परिणामों को बेहतर बनाया जा सकता है।

उप प्राचार्य रश्मिपुरी गोस्वामी ने डाईट शाहपुरा की उत्कृष्ट कार्य परंपरा का उल्लेख करते हुए शोधार्थियों से सकारात्मक सोच एवं गुणवत्तापूर्ण शोध कार्य करने का आग्रह किया।

आईएफआईसी प्रभागाध्यक्ष एवं प्रशिक्षण संयोजक अरविंद चौहान ने बताया कि प्रशिक्षण में भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा, बनेड़ा, आसींद, सुवाणा, कोटड़ी, मांडलगढ़, हुरड़ा, सहाड़ा, रायपुर, करेड़ा, मांडल एवं जहाजपुर सहित विभिन्न ब्लॉकों से कुल 32 रुचिशील शोधार्थी शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।

प्रशिक्षण के दौरान डॉ. विनोद कुमार श्रीवास्तव (व्याख्याता) एवं जगदीश चन्द्र शर्मा (पूर्व प्रधानाचार्य) ने संदर्भ विशेषज्ञ के रूप में शोध के विभिन्न आयामों, शोध पद्धति एवं व्यवहारिक पक्षों पर विस्तार से मार्गदर्शन देते हुए प्रशिक्षण को ज्ञानवर्धक एवं सहभागितापूर्ण बनाया।

आईएफआईसी प्रभारी नितिन जावलिया ने गूगल फॉर्म के माध्यम से प्रतिभागियों की प्रशिक्षण उपरांत मूल्यांकन परीक्षा एवं फीडबैक प्रक्रिया संपन्न कराई।समापन अवसर पर आईएफआईसी प्रभागाध्यक्ष अरविंद चौहान ने सभी प्रतिभागियों, संदर्भ विशेषज्ञों एवं सहयोगी कार्मिकों का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में डाईट शाहपुरा द्वारा आयोजित होने वाले विभिन्न शोध कार्यक्रमों में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया।

प्रशिक्षण में डॉ. प्रभु लाल बडार, दिनेश सिंह भाटी, डॉ. परमेश्वर प्रसाद कुमावत, प्रियव्रत वैष्णव, उग्र सेन, अशरफ शेख, बंसीलाल, लक्ष्मी तेली, प्रियंका शर्मा, भरतदेव धाभाई, हरीश छबलानी, रशीदा तबस्सुम पठान, भूमिका मिश्रा, रसप्रीत कौर, निरुपमा यादव, रामदेव बैरवा, देवीलाल कुमावत, रणजीत बैरागी एवं घनश्याम कोली सहित अनेक शोधार्थियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।

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