शिव महापुराण कथा में गूंजा जीवन का संदेश—भगवान से अटूट संबंध बनाइए

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शिव महापुराण कथा में गूंजा जीवन का संदेश—भगवान से अटूट संबंध बनाइए

विगत नौ दिवस से चल रही कथा का हुआ विश्राम

शाहपुरा (भीलवाड़ा)-राजेन्द्र खटीक।

शाहपुरा, 9 अगस्त। शाहपुरा में विगत नौ दिनों से चल रही श्री शिव महापुराण कथा का रविवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक संदेशों के साथ विश्राम हुआ। कथा के अंतिम दिवस पूज्य महाराज श्री गजेंद्र जी शास्त्री ने श्रद्धालुओं को भगवान शिव से अटूट संबंध बनाने, सत्संग एवं कथा से जुड़े रहने तथा मानव जीवन को भक्ति, संस्कार और सद्कर्मों से सार्थक

बनाने का संदेश दिया।महाराज श्री ने कहा कि भगवान के प्रति केवल भाव नहीं, बल्कि अटूट संबंध होना चाहिए। भाव परिस्थितियों के साथ बदल सकते हैं, लेकिन सच्चा संबंध व्यक्ति को हमेशा जोड़े रखता है। मां-बेटे, पिता-पुत्र और भाई-भाई के संबंधों का उदाहरण देते हुए उन्होंने समझाया कि इसी प्रकार भगवान के साथ भी ऐसा आत्मीय संबंध बनना

चाहिए, जिसमें प्रभु हमारे लिए पराए नहीं, बल्कि अपने बन जाएं।उन्होंने कहा कि मंदिर जाते समय केवल भगवान के दर्शन करने की भावना न रखें, बल्कि यह भाव रखें कि “मैं अपने पिता, माता, दादा, भाई या सखा से मिलने जा रहा हूं।” भगवान से संबंध बनने के बाद भक्ति की दृष्टि और जीवन की दिशा दोनों बदल जाती हैं।कथा में महाराज श्री ने मानव

जीवन में बढ़ते लोभ और मोह पर भी चिंतन कराया। उन्होंने भावपूर्ण शब्दों में कहा—“दुर्लभ मानव तन पाया, कुछ खास नहीं कर पाया, जो लोभ है मन में बसाया, उसका कोई पार न पाया।”उन्होंने कहा कि मनुष्य संसार से विदा होते समय धन-संपत्ति, पद और सांसारिक वस्तुएं साथ नहीं ले जा सकता। साथ जाते हैं तो केवल कर्म, संस्कार और भगवान का स्मरण।

इसलिए मानव जीवन को भक्ति, सत्संग, सेवा और सद्कर्मों से सार्थक बनाना चाहिए।महाराज श्री ने कथा और सत्संग के महत्व पर कहा कि भगवान की स्मृति निरंतर बनी रहे, इसके लिए कथा सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। कथा के माध्यम से भगवान के गुण, लीलाएं और संदेश मनुष्य के जीवन में जीवंत रहते हैं तथा प्रभु के प्रति प्रेम और भक्ति जागृत होती है।महाराज श्री ने युवा शक्ति और संस्कारों की सराहना करते हुए कहा कि जिस समाज में

संस्कारवान युवा और एकता की भावना होती है, वही समाज मजबूत बनता है। उन्होंने कथा से जुड़े युवाओं की जिज्ञासा, सेवा भावना और सहभागिता की सराहना की।वहीं सनातन धर्म और सामाजिक एकता पर उन्होंने कहा कि सनातन धर्म का मूल संदेश जोड़ने का है, बांटने का नहीं। धर्म, समाज, जाति और परिवार के नाम पर बढ़ती दूरियों को कम कर प्रेम, मर्यादा, सम्मान और सद्भाव को मजबूत करने की

आवश्यकता है।कथा विश्राम के पश्चात सभी श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से महा आरती में भाग लेकर भगवान शिव की आराधना की। हर-हर महादेव के जयघोष से कथा स्थल भक्तिमय हो उठा। महा आरती के बाद सभी श्रद्धालुओं ने भोजन प्रसाद ग्रहण किया।नौ दिवसीय कथा के समापन अवसर पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और भावनात्मक वातावरण देखने को मिला।

श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण को अपने जीवन के लिए प्रेरणादायी बताते हुए शिव भक्ति, सत्संग और संस्कारों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।नौ दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा के सफल समापन पर श्री श्रीनाथजी भक्त मंडल ने कथा में पधारे सभी श्रद्धालुओं एवं श्रोताओं, संत-महात्माओं

, सहयोगकर्ताओं तथा सेवा में जुटे सभी सदस्यों का हृदय से आभार व्यक्त किया।मंडल ने कहा कि सभी के सहयोग, सहभागिता और श्रद्धा से नौ दिनों तक कथा का आयोजन भक्तिमय वातावरण में संपन्न हो सका। मंडल ने सभी से भगवान शिव की भक्ति, सत्संग और सनातन संस्कारों से निरंतर जुड़े रहने का आह्वान किया।हर-हर महादेव के जयघोष के साथ नौ दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा का श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में विश्राम हुआ।

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