शिक्षा, रोजगार और हक-अधिकार के लिए उठी आवाज, कुरीतियों को जड़ से मिटाने का आदिवासी समाज ने लिया संकल्प

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ज्ञानचंद खटीक विशाल वाहन रैली में उमड़ा जनसैलाब, पारंपरिक वेशभूषा और संस्कृति ने मोहा मन — शिक्षा, बाल विवाह, नशामुक्ति और रोजगार को लेकर उठी बुलंद आवाज – ज्ञानचंद खटीक

शाहपुरा (भीलवाड़ा)-राजेन्द्र खटीक

।बनेड़ा। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषित विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर बनेडा क्षेत्र में आदिवासी समाज की ओर से विशाल वाहन रैली एवं जनसभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा, युवतियां, महिलाएं एवं समाज के लोग शामिल हुए। पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में सजे युवाओं और युवतियों ने अपनी समृद्ध संस्कृति, रीति-रिवाज और परंपराओं का प्रदर्शन करते हुए आदिवासी एकता एवं सामाजिक जागरूकता का संदेश दिया।कार्यक्रम की शुरुआत विशाल वाहन रैली के साथ हुई।

रैली में बड़ी संख्या में दोपहिया एवं चारपहिया वाहन शामिल रहे। वाहनों पर आदिवासी संस्कृति एवं सामाजिक जागरूकता से जुड़े संदेश लगाए गए। रैली के दौरान ढोल-नगाड़ों और डीजे की धुन पर युवा एवं युवतियां उत्साहपूर्वक नाचते-गाते नजर आए। पारंपरिक वेशभूषा में निकली रैली ने क्षेत्र में आदिवासी संस्कृति की आकर्षक छटा बिखेर दी।रैली विभिन्न मार्गों से होकर सभा स्थल पर पहुंची, जहां विशाल जनसभा का आयोजन किया गया।

सभा स्थल पर बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम में वक्ताओं ने आदिवासी समाज के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक विकास को लेकर विस्तार से विचार व्यक्त किए।शिक्षा को बनाया जाए विकास का आधारज्ञानचंद खटीक अध्यक्ष डा भीमराव अम्बेडकर युवा संगठन संस्था रायपुर भीलवाड़ा ने जनसभा में कहा कि समाज की प्रगति का सबसे मजबूत आधार शिक्षा है।

आदिवासी समाज के बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए अभिभावकों को विशेष ध्यान देना होगा। बेटियों की शिक्षा को भी प्राथमिकता देने की आवश्यकता है। वक्ताओं ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को स्कूल भेजना और उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।वक्ताओं ने युवाओं से आह्वान किया कि वे शिक्षा के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं, तकनीकी शिक्षा और

रोजगारपरक प्रशिक्षण की ओर भी आगे बढ़ें, ताकि समाज के युवा आत्मनिर्भर बन सकें।रूढ़िवादी परंपराओं में बदलाव का आह्वानसभा में ज्ञानचंद खटीक अध्यक्ष डा भीमराव अम्बेडकर युवा संगठन संस्था रायपुर ने सामाजिक कुरीतियों पर भी गंभीर चर्चा । ज्ञानचंद खटीक ने कहा कि समाज की पहचान उसकी संस्कृति और परंपराओं से होती है, लेकिन ऐसी रूढ़िवादी परंपराएं जो समाज के विकास में

बाधा बनती हैं, उनमें समय के साथ सकारात्मक बदलाव आवश्यक है।बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को पूरी तरह समाप्त करने का आह्वान करते हुए वक्ताओं ने कहा कि कम उम्र में विवाह बच्चों के शिक्षा और भविष्य के अवसरों को प्रभावित करता है। समाज के प्रत्येक व्यक्ति को बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता फैलानी चाहिए और बच्चों को शिक्षा एवं सुरक्षित भविष्य का अवसर देना चाहिए।

मृत्यु भोज पर भी हुई चर्चाजनसभा में मृत्यु भोज जैसी सामाजिक परंपराओं पर भी विचार-विमर्श किया गया। वक्ताओं ने कहा कि किसी परिवार में मृत्यु होने पर परिवार पहले ही दुख की स्थिति में होता है, ऐसे समय में अनावश्यक आर्थिक बोझ डालने वाली परंपराओं से बचने की जरूरत है। समाज को ऐसे आयोजनों में होने वाले खर्च के बजाय बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवार की आर्थिक मजबूती पर ध्यान देना चाहिए।नशामुक्ति अभियान चलाने पर

जोरकार्यक्रम में नशामुक्ति को लेकर भी विशेष रूप से जागरूकता का संदेश दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि नशे की आदत परिवार और समाज दोनों को कमजोर करती है। युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है।वक्ताओं ने युवाओं से आह्वान किया कि वे नशे से दूर रहकर शिक्षा, खेल, रोजगार, सामाजिक सेवा और समाज के विकास में अपनी ऊर्जा लगाएं। साथ ही अभिभावकों और समाज के वरिष्ठ लोगों से युवाओं का मार्गदर्शन करने की अपील की गई।

रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की मांगसभा में आदिवासी युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा के साथ रोजगार के अवसर मिलना बेहद जरूरी है। युवाओं को कौशल विकास, तकनीकी प्रशिक्षण, स्वरोजगार एवं सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए प्रभावी प्रयास किए जाने चाहिए।वक्ताओं ने कहा कि

आदिवासी समाज के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता है तो उन्हें उचित अवसर, मार्गदर्शन और संसाधन उपलब्ध कराने की।संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करने का संदेशविश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आदिवासी समाज की पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीत, लोकनृत्य, ढोल-नगाड़े और रीति-रिवाज कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहे। युवाओं और युवतियों ने पारंपरिक वेशभूषा में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर अपनी संस्कृति के

संरक्षण और संवर्धन का संदेश दिया।वक्ताओं ने कहा कि आधुनिकता के साथ आगे बढ़ना जरूरी है, लेकिन अपनी भाषा, संस्कृति, लोककला, परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत को बचाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने के लिए ऐसे आयोजनों की निरंतर

आवश्यकता है।एकजुट होकर समाज के विकास का संकल्पजनसभा के दौरान उपस्थित लोगों ने शिक्षा को बढ़ावा देने, बाल विवाह रोकने, सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता फैलाने, नशामुक्त समाज बनाने, युवाओं को रोजगार से जोड़ने तथा आदिवासी संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया।कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस केवल

उत्सव मनाने का दिन नहीं, बल्कि समाज की वर्तमान स्थिति पर चिंतन करने और आने वाली पीढ़ी के बेहतर भविष्य का संकल्प लेने का अवसर है। यदि समाज शिक्षा को प्राथमिकता देगा, सामाजिक कुरीतियों को पीछे छोड़ेगा और युवाओं को रोजगार एवं अवसरों से जोड़ेगा तो आदिवासी समाज विकास की नई दिशा में मजबूती से आगे बढ़ सकता है।विशाल वाहन रैली और जनसभा के दौरान आदिवासी एकता, संस्कृति संरक्षण, शिक्षा, सामाजिक

जागरूकता, नशामुक्ति और रोजगार के संदेशों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा बनेडा कार्यक्रम मे रतन लाल भील भटेवर,राजु भील कोशिथल,काना भील डेलाना, गणेश भील रायपुर, हजारों की संख्या मे लोग मौजूद रहे।

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