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राजगढ़। बच्चों को नैतिकता का पाठ पढ़ाने और संस्कारवान बनाने हेतु शिक्षकों को आगे आना होगा। -ब्रह्माकुमारी मधु दीदी

पचोर/प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में भारत के नवनिर्माण में शिक्षकों के योगदान अंतर्गत कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें 80 से अधिक शिक्षक शिक्षिकाएं और करीब 12 विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों ने भाग लिया।जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में मंजू गुप्ता, प्रोफेसर आर .के. गुप्ता, शाहिदा हाशमी, शंकर लाल भारती, मनोहर बैरागी, ज्ञान सिंह राजपूत, गोपाल…

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पचोर/प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में भारत के नवनिर्माण में शिक्षकों के योगदान अंतर्गत कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

जिसमें 80 से अधिक शिक्षक शिक्षिकाएं और करीब 12 विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों ने भाग लिया।जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में मंजू गुप्ता, प्रोफेसर आर .के. गुप्ता, शाहिदा हाशमी, शंकर लाल भारती, मनोहर बैरागी, ज्ञान सिंह राजपूत, गोपाल सेन, कृष्ण स्वरूप सक्सेना, संतोष राणा, कवंर लाल जांगड़े, कपिल व्यास, राजगढ़ जिला संस्था प्रभारी ब्रह्माकुमारी मधु दीदी मचांसिन हुए।कार्यक्रम का शुभारंभ दिप प्रज्वलन से किया गया।करीब 80 से अधिक शिक्षकों को अभिनंदन पत्र तिलक एवं पट्टे से देकर सम्मान किया गया।

ब्रह्माकुमारी मधु दीदी ने मूल्यनिष्ठ शिक्षा, नैतिक शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि बच्चों को संस्कारवान बनाने के लिए हम सभी को परम शिक्षक परमात्मा से मन के तार जोड़ने की आवश्यकता है, आज के जीवन में आत्मिक शांति के लिए हमें ध्यान की ओर बढ़ना चाहिए।भारत का प्राचीन राजयोग प्रसिद्ध है,जो गीता में वर्णित है, इस योग से हम अपनी कर्मेंद्रियों को अपने हिसाब से चला सकते हैं मन को सही दिशा देकर आत्मिक शांति का अनुभव कर सकते हैं।

आज इस योग की बहुत आवश्यकता है इससे हमारे अंदर नैतिक मूल्य आएंगे, जिससे हम मूल्यनिष्ठ समाज की स्थापना कर सकेंगे। शिक्षक बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ गुणवान बनाने का भी प्रयास करें। सभी अतिथियों ने अपनी बात रखते हुए कहा कि भारत के नवनिर्माण में हम शिक्षकों का योगदान बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि हम ही आने वाली पीढ़ी को महान बनाने के अग्रसर है। हम सब प्रयासरत हैं।

कार्यक्रम में नन्हे मुन्ने बच्चों नेशिक्षकों के लिए सुंदर नृत्य प्रस्तुत किये, तो वही भगवान दास सोनी और बी.एल.रुहेला ने कविता के माध्यम से शिक्षकों को संदेश दिया। ब्रह्माकुमारी वैशाली दीदी ने राजयोग ध्यान करवारकर स्वयं के अंदर की शक्तियों को जगाया सभी को शांति का अनुभव कराया।आभार हरिसिंह मेवाड़ा ने किया।

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