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सरस्वती विद्या मंदिर भरतगढ़ विद्यालय परिसर में सप्तशक्ति संगम कार्यक्रम का आयोजन।

दतिया। विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के मार्गदर्शन में रविवार को सरस्वती विद्या मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भरतगढ़ दतिया में सप्तशक्ति संगम कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को पंच परिवर्तन के तहत कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण, सामाजिक समरसता, स्व का बोध और नागरिक कर्तव्य के तहत उनके व्यक्तित्व के विकास पर…

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दतिया। विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के मार्गदर्शन में रविवार को सरस्वती विद्या मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भरतगढ़ दतिया में सप्तशक्ति संगम कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को पंच परिवर्तन के तहत कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण, सामाजिक समरसता, स्व का बोध और नागरिक कर्तव्य के तहत उनके व्यक्तित्व के विकास पर जोर देना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलन कर एवं सरस्वती वंदना के साथ किया गया।

संगोष्ठी के उपस्थित अतिथियों महोदया श्रीमती मनीषा शर्मा (सदस्य बाल कल्याण आयोग), श्रीमती राधिका वानखेड़े (कार्यक्रम अध्यक्ष) श्रीमती मंजू शर्मा (प्राचार्य नदी गेट ग्वालियर), श्रीमती सुनीता श्रीवास्तव (सप्तशक्ति संगम जिला संयोजिका), श्रीमती मानसी मुडौतिया (सप्तशक्ति संगम सहसंयोजी संयोजिका) सप्तशक्ति संगम कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीमती राधिका वानखेडे ने की।

अतिथियों का स्वागत विद्यालय की बहन रिद्धिमा राज एवं गीता गुर्जर द्वारा किया गया। कार्यक्रम की प्रस्तावना सप्तशती संगम की जिला संयोजिका श्रीमती सुनीता श्रीवास्तव ने रखी। श्रीमती मनीषा शर्मा एवं श्रीमती मंजू शर्मा ने कुटुंब प्रबोधन का विषय रखा

जिसमें सभी मातृशक्ति को संबोधित किया। इसके पश्चात विशिष्ट माता बहनों का सम्मान किया गया जिसमें शहीद रामजी चरण मिश्रा की पत्नी श्रीमती प्रभा मिश्रा, अभिषेक जी गुप्ता (प्रचारक) की माताजी श्रीमती आशा गुप्ता, संयुक्त परिवार हेतु श्रीमती ज्योति दुबे (पार्षद वार्ड क्रमांक 8), बहन अंजलि रावत (खेलो इंडिया गोल्ड मेडलिस्ट) की माताजी श्रीमती रानी रावत को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही श्रीमती राधिका वानखेडे जी ने बताया कि हर महिला में कीर्ति, श्री, वाक्, स्मृति, मेधा,धृति और क्षमा जैसे सात गुण सप्तशक्ति के रूप में प्राकृतिक रूप से मौजूद होते है। महिलाओं को इन गुणों को पहचान कर विकसित करना चाहिए ताकि वह अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा और संस्कार दे सके।

इन सात शक्तियों में हमारी संस्कृति की आत्मा बसती है और जहां नारी का सम्मान होता है वहां देवता भी निवास करते हैं नारी इन सभी शक्तियों का संगम है वह सृजन करती है, पोषण करती है और समाज के मूल्यों को नई दिशा देती है हमारी संस्कृति में नारी को देवी माना है

क्योंकि उनमें सृजन की क्षमता है नारी न केवल एक रूप में बल्कि अनेक रूपों में शक्ति का प्रदर्शन करती है आज सप्तशक्ति संगम मैं हम स्मरण करते हैं शक्ति बाहर नहीं बल्कि हमारे भीतर है हम अपनी-अपनी भूमिका में इन साथ शक्तियों को जीना है

चाहे वह मां हो,शिक्षिका हो, कर्मयोगीनी हो, या समाज सेविका हो हर रूप में हम शक्ति हैं जब नारी जागृत होती है तो समाज जागृत होता है विद्या भारती जैसे संस्थान इन मूल्यों को नई पीढ़ी के लिए संचालित कर रहे हैं यह वास्तव में प्रसंनीय है।

आज के बच्चे केवल विद्यालय नहीं बल्कि संस्कृति चरित्र और चेतना का पाठ सीख रहे हैं लिए हम सब मिलकर प्रण लें कि हम अपनी कीर्ति, वाणी, स्मृति, घृति, मेघा, क्षमा और श्री को जीवन में उतारकर अपने परिवार, समाज और राष्ट्र को आगे बढ़ाएं।

उन्होंने संयुक्त परिवार के महत्व को बताते हुए कहा की बड़ों के अपने दायित्व होते है और छोटो के मन में बड़ों के प्रति आदर होना चाहिये। कार्यक्रम संचालन श्रीमती सीता सक्सेना एवं बहन रोहिणी कुशवाहा ने किया।

सप्तशती संगम कार्यक्रम में 260 से अधिक महिलाओं ने सहभागिता की तथा अंत में अतिथियों का आभार श्रीमती कामिनी तोमर दीदी द्वारा प्रकट किया गया

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