भिंड-मालनपुर में ‘ओम शांति गौरवपूर्ण वृद्धावस्था एवं सामान्य जीवन’ कार्यक्रम का आयोजन
स्कूलों में ब्रह्माकुमारी ज्योति बहन व साथियों ने दिया प्रेरक संदेश
बंटी गर्ग पत्रकार जिला व्यूरो भिंडअंधेर नगरीकबीर मिशन समाचारमो. 9826815098
भिंड/मालनपुर।स्थानीय क्षेत्र के सरकारी एवं निजी स्कूलों में ‘ओम शांति गौरवपूर्ण वृद्धावस्था एवं सामान्य जीवन’ विषय पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।
इस कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारी संस्थान की प्रतिनिधि ज्योति बहन एवं उनके सहयोगी भाई–बहनों ने विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अभिभावकों को महत्वपूर्ण संदेश देते हुए जीवन को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।
इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य छात्रों को चरित्र निर्माण, वृद्धजनों के सम्मान, मानवीय मूल्यों, योग व ध्यान तथा सकारात्मक विचारधारा से जोड़ना था, ताकि वे अपने भविष्य को श्रेष्ठ बना सकें और समाज में आदर्श नागरिक के रूप में अपनी भूमिका निभा सकें।
कार्यक्रम में उपस्थिति
सरकारी और विभिन्न प्राइवेट स्कूलों में आयोजित सत्रों में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।
शिक्षकों ने भी इस कार्यक्रम का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों के मानसिक, सामाजिक और नैतिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
ज्योति बहन का प्रेरक संदेश
ब्रह्माकुमारी ज्योति बहन ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि—“वृद्धावस्था जीवन का अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि अनुभवी और शांतिपूर्ण अध्याय होता है।
हमें अपने जीवन में माता-पिता, दादा-दादी एवं बुजुर्गों का सम्मान करना चाहिए, क्योंकि उन्हीं के अनुभव हमारे लिए मार्गदर्शक होते हैं।” उन्होंने समझाया कि वर्तमान समय में लोग आधुनिकता की दौड़ में मानवीय संवेदनाओं से दूर होते जा रहे हैं। ऐसे में बच्चों और युवाओं को परिवार व समाज में बुजुर्गों की भूमिका को समझना आवश्यक है।
उन्होंने बच्चों को यह भी बताया कि सकारात्मक सोच, योग, ध्यान और नियमित नैतिक आचरण हमें तनावमुक्त रहने और सफल जीवन का मार्ग दिखाते हैं।मानवीय मूल्य और संस्कार पर जोरकार्यक्रम के दौरान बच्चों को बताया गया कि जीवन में संस्कार और मूल्य सबसे बड़ी पूंजी हैं।
यदि मनुष्य अपने व्यवहार में विनम्रता, सेवा-भाव, सत्य, अहिंसा और करुणा को अपनाता है तो उसका जीवन स्वतः ही श्रेष्ठ बन जाता है।ज्योति बहन ने यह भी कहा कि—“मोबाइल और सोशल मीडिया की दुनिया ने बच्चों का समय और ध्यान बांट दिया है। ऐसे में जरूरी है कि छात्र अपने अध्ययन, मनोविज्ञानिक शांति और व्यवहारिक जीवन में संतुलन बनाए रखें। योग और मेडिटेशन आपको मानसिक शांति प्रदान करते हैं और एकाग्रता बढ़ाते हैं।”
वृद्धजनों के सम्मान का संदेश
कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य वृद्धावस्था को गरिमा प्रदान करना था। छात्रों को बताया गया कि बुजुर्ग समाज की धरोहर हैं। उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार करना, उनकी सेवा करना और उनके अनुभवों से सीख लेना हर पीढ़ी की जिम्मेदारी होती है।
ब्रह्माकुमारी के सदस्यों ने उदाहरण देकर बताया कि कैसे छोटे-छोटे आदर्श व्यवहार—जैसे बुजुर्गों को समय देना, उनकी बात सुनना, उनकी जरूरतों का ध्यान रखना—हमारे परिवार को खुशहाल बनाते हैं।
शिक्षकों का सहयोग एवं उत्साह
इस कार्यक्रम को स्कूलों के शिक्षकों ने विशेष समर्थन दिया। कई शिक्षकों ने कहा कि बच्चों में बढ़ती तनाव, प्रतियोगिता और डिजिटल स्क्रीन टाइम के बीच ऐसे आध्यात्मिक एवं नैतिकता आधारित कार्यक्रम बेहद उपयोगी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि ऐसे आयोजन से विद्यार्थियों की सोच सकारात्मक होती है तथा उनमें आत्मविश्वास, अनुशासन और नैतिक आचरण बढ़ता है।
विद्यार्थियों की प्रतिक्रियाएँ
कई विद्यार्थियों ने बताया कि उन्हें यह कार्यक्रम बेहद प्रेरक लगा।कुछ ने कहा कि वे अब अपने घर के बुजुर्गों के साथ अधिक समय बिताएंगे और उनके अनुभवों से सीखने का प्रयास करेंगे। छात्रों ने मेडिटेशन करते समय शांति और एकाग्रता का अनुभव भी साझा किया।सकारात्मक वातावरण बना
स्कूल परिसर में इस कार्यक्रम के चलते पूरे दिन एक आध्यात्मिक और शांतिमय वातावरण बना रहा। ज्योति बहन और उनके साथियों ने कार्यक्रम का समापन “ओम शांति” के साथ किया और सभी को जीवन में सादगी, शांति और सेवा के मार्ग को अपनाने का संदेश दिया।








