विश्व हीमोफीलिया दिवस पर जीएमसी दतिया में राष्ट्रीय स्तर की सीएमई आयोजित, विशेषज्ञों ने साझा किए आधुनिक उपचार के आयाम।
दतिया। विश्व हीमोफीलिया दिवस के अवसर पर शासकीय मेडिकल कॉलेज (जीएमसी), दतिया में पैथोलॉजी विभाग द्वारा माइक्रोबायोलॉजी एवं बायोकैमिस्ट्री विभाग के संयुक्त सहयोग से “हीमोफीलिया अपडेट्स 2026: डायग्नोसिस टू मैनेजमेंट” विषय पर एक दिवसीय सतत चिकित्सा शिक्षा (CME) कार्यक्रम का भव्य एवं सफल आयोजन किया गया।
इस आयोजन का उद्देश्य हीमोफीलिया जैसे जटिल रक्तस्राव विकार के प्रति चिकित्सा समुदाय में नवीनतम जानकारी का प्रसार करना तथा इसके समयबद्ध निदान और प्रभावी प्रबंधन पर जोर देना रहा।
कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक डॉ. अरुणा कुमार (डायरेक्टर ऑफ मेडिकल एजुकेशन) एवं संरक्षक डॉ. (प्रो.) दीपक सिंह मरावी (डीन एवं सीईओ, जीएमसी दतिया) रहे, जिनके मार्गदर्शन में यह शैक्षणिक आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
सह-संरक्षक के रूप में डॉ. अर्जुन सिंह (प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, पैथोलॉजी) का महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। आयोजन की रूपरेखा को सुदृढ़ बनाने में सलाहकार मंडल की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिसमें डॉ. किरण त्रिपाठी (प्रोफेसर, माइक्रोबायोलॉजी) एवं डॉ. अभिषेक शर्मा (प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, बायोकैमिस्ट्री) शामिल रहे।
कार्यक्रम के संचालन में आयोजन अध्यक्ष डॉ. आनंद भदकारिया, सह-अध्यक्ष डॉ. अभिषेक मेहता, आयोजन सचिव डॉ. मीनू बाकना तथा वैज्ञानिक सचिव डॉ. कमल कछावा ने समन्वय स्थापित करते हुए कार्यक्रम को सफल बनाया।
सह-सचिवों के रूप में डॉ. निधि शर्मा, डॉ. रज्जू तिवारी, डॉ. आभा गुप्ता, डॉ. वंदना पहाड़िया एवं डॉ. स्वाति श्रीवास्तव का योगदान भी उल्लेखनीय रहा।सीएमई में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों से आमंत्रित विशेषज्ञ वक्ताओं ने भाग लिया और अपने अनुभव साझा किए, प्रमुख वक्ताओं में डॉ. वी.के. भारद्वाज (पूर्व प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, पैथोलॉजी, गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल), डॉ. दीपक सिंह मरावी, डॉ. ज्योति प्रियदर्शिनी (जी.आर. मेडिकल कॉलेज, ग्वालियर), डॉ. पल्लवी अग्रवाल (एम.एल.बी. मेडिकल कॉलेज, झांसी), डॉ. रवि अम्बे (पीडियाट्रिक्स, जी.आर. मेडिकल कॉलेज, ग्वालियर), डॉ. अपराजिता तोमर (एसआरवीएस मेडिकल कॉलेज, शिवपुरी), डॉ. विदुषी सचदेवा एवं डॉ. कोमल कपूर (एचएसीएल) तथा डॉ. छाया शेवड़ा (एम.एल.बी. मेडिकल कॉलेज, झांसी) शामिल रहे।
विशेषज्ञों ने अपने व्याख्यानों में हीमोफीलिया के प्रारंभिक लक्षणों की पहचान, उन्नत प्रयोगशाला जांच तकनीकों, जटिलताओं की रोकथाम, तथा आधुनिक उपचार पद्धतियों जैसे फैक्टर रिप्लेसमेंट थेरेपी और नई उभरती चिकित्सा विधियों पर विस्तार से प्रकाश डाला, साथ ही यह भी बताया गया कि समय पर निदान एवं उचित प्रबंधन से हीमोफीलिया रोगियों का जीवन सामान्य और सुरक्षित बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम में जीएमसी दतिया के फैकल्टी सदस्यों, सीनियर एवं जूनियर रेजिडेंट्स, इंटर्न्स, पैरामेडिकल स्टाफ तथा लैब टेक्नीशियनों ने बड़ी संख्या में उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया, जिससे यह कार्यक्रम अत्यंत ज्ञानवर्धक और उपयोगी सिद्ध हुआ।
सीएमई के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र एवं वैलिडिक्टरी सेशन आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए और आयोजन की सराहना की। इस अवसर पर वक्ताओं एवं आयोजकों को सम्मानित भी किया गया।
इस सफल आयोजन के माध्यम से न केवल चिकित्सा विशेषज्ञों को नवीनतम जानकारी प्राप्त हुई, बल्कि समाज में हीमोफीलिया के प्रति जागरूकता बढ़ाने, शीघ्र पहचान एवं समुचित उपचार के महत्व को भी प्रभावी ढंग से रेखांकित किया गया।




