अंधेरे नगरी/ दतिया। जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) की पारदर्शिता सुनिश्चित करने एवं उपभोक्ताओं को उचित मात्रा में खाद्यान्न उपलब्ध कराने के लिए कलेक्टर स्वप्निल वानखडे द्वारा लगातार निगरानी और सख्त निर्देश जारी किए गए है। जिला आपूर्ति अधिकारी सनद शुक्ला के मार्ग दर्शन, इसी क्रम में जिले की अनुष्ठा महिला प्राथमिक उपभोक्ता सहकारी भंडार दतिया द्वारा संचालित उचित मूल्य दुकान गढ़ी (कोड–0701153) में बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है, कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी राजेश जाटव द्वारा प्रस्तुत विस्तृत जांच प्रतिवेदन और वरिष्ठ अधिकारियों की अनुशंसाओं के बाद तीन जिम्मेदार व्यक्तियों—दुकान अध्यक्ष विनीता सेन, विक्रेता निधि देवी और सहायक विक्रेता धर्मेन्द्र गुर्जर के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर ली गई है, कैसे उजागर हुआ, घोटाला, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) दतिया के दिनांक 01.12.2025 के पत्र क्रमांक 1089 के आधार पर यह संदेह गहराया कि दुकान में वितरण व्यवस्था में गंभीर अनियमितताएँ हो रही हैं।
कई उपभोक्ताओं की शिकायतें मिलने और निरीक्षण दल द्वारा मौके पर किए गए परीक्षण में यह पाया गया कि “गेहूँ – 45.66 क्विंटल “फोर्टिफाइड चावल – 47.12 क्विंटल, नमक – 2.20 क्विंटल, शक्कर – 18 किलोग्राम, जितना खाद्यान्न दुकान में उपलब्ध होना चाहिए था, वह मौजूद नहीं था। प्रारंभिक जांच में स्पष्ट हुआ कि यह समस्त खाद्यान्न हितग्राहियों में वितरण न कर अवैध तरीके से बेचकर लाभ कमाने हेतु खुर्द-बुर्द किया गया था। खाद्यान्न की बाजार कीमत लगभग 3.30 लाख रुपये, जांच में खाद्यान्न की अनुमानित कीमत निम्नानुसार पाई गई,गेहूँ: ₹ 1,36,980 फोर्टिफाइड चावल: ₹1,88,480, नमक: ₹3,300, शक्कर: ₹810, कुल कीमत: ₹3,29,510यानी लगभग 3.30 लाख रुपये का अनाज गायब पाया गया।यह खाद्यान्न गरीब हितग्राहियों के हक का था, जिसे मनमाने तरीके से बाजार में बेचे जाने की आशंका जताई गई है।
कारण बताओ नोटिस का नहीं दिया जवाब, अनुविभागीय अधिकारी द्वारा तीनों जिम्मेदार व्यक्तियों को कारण बताओ सूचना पत्र जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन”किसी ने भी जवाब प्रस्तुत नहीं किया, मौके पर मिली अनियमितताएँ प्रमाण सहित सत्यापित हुईं, जांच प्रतिवेदन अपर कलेक्टर को भेजा गया, कलेक्टर द्वारा आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत अभियोजन की अनुमति प्रदान की गई, इन सभी तथ्यों के आधार पर एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई प्रारंभ की गई।धारा 3/7 आवश्यक वस्तु अधिनियम में मामला दर्ज, कलेक्टर के निर्देशों का पालन करते हुए कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी राजेश जाटव ने थाना गोराघाट में प्रकरण से संबंधित समस्त दस्तावेजों के साथ एक लिखित आवेदन प्रस्तुत किया। थाना प्रभारी द्वारा दस्तावेजों की जांच के बाद “अध्यक्ष, विक्रेता और सहायक विक्रेता के विरुद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3/7 के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध कर लिया गया है।
पुलिस ने मामले को विवेचना में ले लिया है और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है। 118 पृष्ठों की विस्तृत जांच रिपोर्ट, जांच अधिकारी द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन में “स्टॉक रजिस्टर, वितरण रजिस्टर, उपभोक्ता साक्षात्कार, दुकान निरीक्षण रिपोर्ट, गोदाम–दुकान ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड, वितरण में किए गए घपलों के प्रमाण,सहित कुल 118 पृष्ठ संलग्न किए गए हैं। यह रिपोर्ट जिले की पीडीएस प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित हो रही है, कलेक्टर का कठोर संदेश “हितग्राहियों के हक का एक दाना भी गलत हाथों में नहीं जाने देंगे” कलेक्टर स्वप्निल वानखडे ने हाल ही में पीडीएस दुकानों में अनियमितताओं पर सख्त रुख अपनाते हुए कई बार स्पष्ट कहा है कि “गरीबों के हक का एक दाना भी अगर गलत हाथों में गया तो जिम्मेदारों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।
”गढ़ी उचित मूल्य दुकान में दर्ज यह एफआईआर प्रशासन की शून्य सहनशीलता नीति का वास्तविक उदाहरण है। यह कार्रवाई न केवल जिले की खाद्यान्न वितरण प्रणाली में सुधार का संकेत देती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कलेक्टर और जिला प्रशासन हितग्राहियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। गढ़ी पीडीएस दुकान में खाद्यान्न घोटाला उजागर होना उन सभी दुकानों के लिए चेतावनी है, जहाँ अभी भी नियमों का पालन नहीं हो रहा।

























