राजगढ़। देश में रोज ऐसी घटनाएं होती है। समय, काल, परिस्थिति, भूगोल और परम्परा बदल गई। हर जगह अपडेट हो गया टेक्नोलॉजी बहुत तेजी से बदल गई है लेकिन एक चीज जो बदलना चाहिए वहां नहीं बदल रही वहा है समाजिक परिदृश्य की घटिया और गंदी मानसिकता?
आज सवाल यहा नहीं है कि शादी मे दलित दुल्हे को घोडी पर बैठने नहीं दे रहे, डीजे नहीं बजाने दे रहे, अच्छा टेंट नहीं लगा सकता, ढोल नहीं बजा सकता, बिंदोरी नहीं निकाल सकता, मंदिर मे चढने नहीं दे सकते आदि तरह तरह की तमाम बाते है और सच्चाई भी है। सवाल है कि आखिर ऐसा होता क्यों है?
ऐसी घटनाए कुछ ऐसे गांव मे पाई जाती है जहाँ दलितों की संख्या कम होती है और कई गांव मे संघर्ष करके अपने ही गांव से आजादी भी पाई है। आज मुझे इस खबर बनाने मे भी शर्म आ रही है मन भी विचलित हो रहा है की आज के इस युग मे ऐसी घटना होना क्या लाजमी है।
खैर इसमें किसकी गलती है क्या आप बता सकते है –
क्या दलित समाज की गलती है जो ये सब करना चाहते है?
क्या प्रशासन की गलती है जो कुछ घटनाओ के बाद भी जनजागृती और कानून की परिभाषा नहीं समझा पाई?
क्या राजनीती के नेताओं की गलती है जो इसका वोट के लिए सही गलत की पहचान करना हि नहीं चाहते?
क्या उन तथाकथित समाज की गलती है जो इनको आजादी का हक देना नहीं चाहते?
क्या उन दलित नेताओं की गलती है जो केवल ऐसे मुददे उठाकर केवल अपनी राजनीती रोटीया बनाने मे लगे है
?क्या संविधान कमजोर है?
क्या पुलिस कमजोर है?
क्या समाज कमजोर है?
क्या कानून और समाजिक सरोकार का कोई मेल नहीं है?
ऐसे प्रशासन भविष्य मे ऐसी घटनाएं न हो इसके लिए कोई कदम नहीं उठाती है वहा भी दलित परिवार की उस कमजोर कडी को देखती है ताकि किसी तरह मामले को केवल आज के लिए निपटा जा सके, बीच का रास्ता निकालने मे लग जाती है और नहीं तो बल के साथ कानून का डर दिखाकर आज तो समस्या का टाला जा सकता है लेकिन कल का क्या है उन्हें तो वही गांव मे रहना है और कल कोई घटना बनती है तो भी कार्यवाही दलितों पर ही कि जाती है या क्रास केस बनाकर भी भविष्य मे समझोते की जगह बन जाती है।
इस आवेदन की सबसे अहम पहलू यहा है कि आज भी भाजपा सरकार के राजगढ़ जिले के भाजपा जिलाध्यक्ष ज्ञानसिंह गुर्जर का गावं बताया जा रहा है और ये दुसरी बाद जिला अध्यक्ष बने है। बहुजन समाज मे अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछडा वर्ग भी शामिल है जिसे दलित नेता इन्हे जोडने की बात करते है लेकिन वास्तविकता यहाँ है की दलितों पर सर्वणों से ज्यादा ओबीसी वर्ग के लोग ही अत्याचार करते है? ऐसी घटनाओ से ही देश, समाज और गांव कमजोर पडता है।
अब सवाल है कि प्रशासन क्या करेगा और भविष्य मे ऐसी घटनाए न हो इसके लिए कोई कदम उठाएगा तथा भाजपा जिलाध्यक्ष ज्ञानसिंह गुर्जर अपने ही गांव की इस परंपरा को कैसे तोडते हुए दलितों का साथ देगे या गांव के गंदी मानसिकता वालो का साथ देगे ये उनके लिए बडी चुनौती है, ये तो अब शादी के दिन ही पता चलेगा की एफआईआर किसकी कटेगी?
आवेदक ने पुलिस अधीक्षक राजगढ को लिखा ऐसा आवेदन ग्राम लिम्बोदा तहसील जीरापुर थाना क्षेत्र माचलपुर में घोड़ी पे चड़ना विन्दुरी निकालना और डी. जे. बजाने के संबंध में एसपी राजगढ़ से निवेदन किया कि मैं लक्ष्मी बाई पिता देव सिंह निवासी ग्राम लिम्बोदा तहसील जीरापुर थाना क्षेत्र माचलपुर की शादी दिनांक 18.05.2026 को है जिसमें आशंका है ग्राम लिम्बोदा के लोगो द्वारा उवद्रव के किया जा सकता है क्योकि देश को आजाद हुए 78 साल हो गयें है।
आज तक अनुसूचित जाति का दुल्हा या दुल्हन की शादी में ना तो घोड़ी चढ़ पाया ना ही डी.जे.बज पाया आज मेरी बेटी लक्ष्मी और दमाद प्रकाश ने इच्छा जताई कि हम स्वतंत्र है और हमारी शादी धूम-धाम से ही होगी गांव में सभी अनूसूचित जाति के लोगो में भय का माहोल है।
17 तारिख से 18 तारिख को शादी की मुख्य रश्में पुरी की जायेंगी जिसमें हमें पुलिस की सहायता अत्यन्त आवश्यकता है ताकि शादी में किसी प्रकार की अनहोनी ना हो ओर हमें पुरी उम्मीद है कि जिला प्रशासन हमारी पुरी-पुरी मदद कर शादी को सम्पन्न करायेंगा।















